गड़ई नदी पर संकट: मुगलसराय-चकिया मार्ग के चौड़ीकरण में नदी पाटने का विरोध, पूर्व प्रमुख बाबूलाल ने दी आंदोलन की चेतावनी

मुगलसराय-चकिया रोड चौड़ीकरण के दौरान गड़ई नदी को पाटे जाने से हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है। पूर्व प्रमुख बाबूलाल यादव ने मौके पर पहुंचकर सरकार को चेताया है कि यदि नदी का अस्तित्व मिटाया गया तो बड़ा आंदोलन होगा।

 

मुगलसराय-चकिया मार्ग चौड़ीकरण का कड़ा विरोध

गड़ई नदी को पाटे जाने से किसान परेशान

हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूबने की आशंका

पूर्व प्रमुख बाबूलाल यादव ने किया स्थल निरीक्षण

जिलाधिकारी कार्यालय घेराव की दी गई चेतावनी

चंदौली जिले में विकास और पर्यावरण के बीच एक नया संघर्ष छिड़ गया है। मुगलसराय–चकिया मार्ग के चौड़ीकरण परियोजना के तहत गड़ई नदी के अस्तित्व पर आए संकट ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। रविवार को पूर्व प्रमुख बाबूलाल यादव ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए।

हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पर मंडराया संकट
स्थल निरीक्षण के दौरान बाबूलाल यादव ने स्थानीय किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गड़ई नदी इस क्षेत्र की लाइफलाइन है। यदि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोका गया या उसे पाटा गया, तो इसका खामियाजा सैकड़ों किसानों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि नदी के संकुचित होने से बरसात और बाढ़ के समय हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो जाएगी। इससे न केवल फसलें बर्बाद होंगी, बल्कि किसानों की आर्थिक कमर भी टूट जाएगी।

सत्तापक्ष पर लगाया केवल आश्वासन देने का आरोप
पूर्व प्रमुख ने प्रदेश सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तापक्ष के लोग किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल आश्वासन का झुनझुना थमा रही है। नदी के संरक्षण और सफाई के नाम पर बजट में भारी कटौती की जा रही है, जो किसानों के साथ सरासर धोखा है। उन्होंने मांग की कि सड़क निर्माण से पहले नदी की जल निकासी की समुचित और आधुनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

नदी के विस्तारीकरण की आवश्यकता
क्षेत्रीय ग्रामीणों का तर्क है कि गड़ई नदी को बचाने के लिए इसे पाटने के बजाय इसके गहरीकरण और विस्तारीकरण की सख्त जरूरत है। किसानों का कहना है कि विकास की गति का वे स्वागत करते हैं, लेकिन यह विकास उनके विनाश की कीमत पर नहीं होना चाहिए। गड़ई नदी के अस्तित्व को खत्म करना इस पूरे इलाके के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बिगाड़ सकता है।

जिलाधिकारी कार्यालय के घेराव का ऐलान
बाबूलाल यादव ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द ही नदी के संरक्षण के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई और नदी को पाटने का काम बंद नहीं हुआ, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा और एक व्यापक आंदोलन शुरू होगा।

विरोध में शामिल रहे प्रमुख लोग
इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नदी संरक्षण की मांग का समर्थन करने वालों में मुख्य रूप से तेजबली यादव, कमला कन्नौजिया, शमशेर बिंद, बसंत मौर्य, छोटू बिंद, संजय भारती, सुरेश बिंद, चंद्रशेखर चन्ना, अखिलेश बिंद और बाबुनंदन बिंद सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में नदी को उसके मूल स्वरूप में बनाए रखने की मांग की।