सपा सांसद का छलका दर्द: जिला न्यायालय शिलान्यास में नहीं मिला न्योता, वीरेंद्र सिंह बोले- 'विपक्षी सांसद-विधायकों से डरते हैं मुख्यमंत्री'
सांसद वीरेंद्र सिंह को नहीं मिला निमंत्रण
भाजपा ने विकसित किया नया राजनीतिक कल्चर
अधिकारियों ने बनाया भाजपा का निजी कार्यक्रम
सवाल पूछने के डर से जनप्रतिनिधि दरकिनार
देर से ही सही, न्यायालय मिलने पर खुशी
चंदौली जनपद में बनने वाले एकीकृत जिला न्यायालय परिसर के भव्य शिलान्यास समारोह को लेकर राजनीति गरमा गई है। इस ऐतिहासिक आयोजन में निमंत्रण न मिलने पर चंदौली के समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने गहरा दुख व्यक्त किया है। 'चंदौली समाचार' के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने न केवल अपनी नाराजगी जाहिर की, बल्कि प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भाजपा ने विकसित किया 'दुश्मनी' का कल्चर
सांसद वीरेंद्र सिंह ने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने राजनीति में एक ऐसा नकारात्मक कल्चर विकसित किया है, जहाँ विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को दुश्मन की नजर से देखा जाता है। उन्होंने कहा, "संवैधानिक प्रोटोकॉल के तहत सांसद और विधायक पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन भाजपा के लोग हमें सांसद स्वीकार करने को ही तैयार नहीं हैं। लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए, न कि विरोधियों को पूरी तरह दरकिनार करना।"
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री किसी दल के नहीं होते
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे का जिक्र करते हुए सपा सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के होते हैं। उन्होंने पुरानी लोकतांत्रिक परंपराओं की याद दिलाते हुए कहा, "हमने अपने राजनीतिक जीवन में देखा है कि सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से निमंत्रण भेजा जाता था। भले ही कुछ लोग विचारधारा के कारण न जाएं, लेकिन निमंत्रण न भेजना संवैधानिक गरिमा का उल्लंघन है।" उन्होंने अधिकारियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने एक सरकारी आयोजन को भाजपा का निजी कार्यक्रम बना दिया है।
डर की राजनीति: सवाल पूछने से कतरा रही सरकार
सांसद वीरेंद्र सिंह ने उपेक्षा का एक बड़ा कारण 'डर' बताया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग इस बात से घबराते हैं कि अगर विपक्ष के सांसद या विधायक कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे, तो वे मंच से कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार और किसानों की समस्याओं पर सवाल उठा सकते हैं। इसी संभावित किरकिरी से बचने के लिए विपक्ष को जानबूझकर दूर रखा जा रहा है।
विकास का स्वागत, उपेक्षा का विरोध
हालाँकि उन्होंने निमंत्रण न मिलने पर विरोध जताया, लेकिन जिले में होने वाले विकास कार्य का स्वागत भी किया। उन्होंने कहा, "भले ही हमें न बुलाया गया हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री का चंदौली की धरती पर स्वागत है। 28 साल के लंबे इंतजार के बाद चंदौली को अपना जिला न्यायालय परिसर मिलने जा रहा है, यह खुशी की बात है।"
उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनें और अतिथियों का स्वागत करें। उन्होंने अंत में भावुक स्वर में कहा कि उन्हें न बुलाएं, कोई बात नहीं, लेकिन चंदौली के विकास की गति में कोई कोताही न बरतें।