लंबे मनमुटाव के बाद पूर्व मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय से मिलीं राज्यसभा सांसद साधना सिंह, खत्म हुई पुरानी कड़वाहट?
चंदौली राजनीति में बड़ी सियासी पहल
साधना सिंह और महेंद्र नाथ पांडेय मिले
सारनाथ आवास पर हुई आत्मीय मुलाकात
2022 टिकट कटने से था मनमुटाव
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई चर्चा
चंदौली जिले के राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। लंबे समय के आपसी खिंचाव और कड़वाहट के बाद राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय से मुलाकात की है। यह मुलाकात डॉ. पांडेय के वाराणसी के सारनाथ स्थित आवास पर हुई।
सोशल मीडिया पोस्ट से सामने आई जानकारी
इस मुलाकात की जानकारी खुद राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर शेयर की। उन्होंने लिखा, "पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद चंदौली एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा उत्तर प्रदेश आदरणीय श्री महेंद्र नाथ पांडेय जी के सारनाथ स्थित आवास पर आत्मीय भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस अवसर पर उनसे आत्मीय संवाद हुआ।" हालांकि, इसके अलावा उन्होंने पोस्ट में कोई और राजनीतिक टिप्पणी नहीं की है।
टिकट कटने के बाद से बढ़ा था मनमुटाव
गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मुगलसराय सीट से साधना सिंह का टिकट कट गया था। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच कड़वाहट खुलकर सामने आ गई थी। उस दौरान साधना सिंह के समर्थकों में काफी नाराजगी देखी गई थी और पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के पुतले तक फूंके गए थे। तब से ही दोनों नेताओं के बीच एक दूरी बनी हुई थी। ऐसा कहा जा रहा था कि पुतले फूंकने वालों में साधना सिंह के समर्थक शामिल थे।
हार और राज्यसभा मनोनयन के बाद बदली परिस्थितियां
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय चंदौली सीट से चुनाव हार गए थे। वहीं दूसरी ओर, पार्टी ने साधना सिंह को लोकसभा चुनाव के पहले ही राज्यसभा भेज दिया था। लंबे अरसे बाद दोनों बड़े नेताओं के एक साथ आने और इस तरह आत्मीय माहौल में मिलने से जिले की राजनीति गरमा गई है।
राजनीतिक गलियारों में शुरू हुईं अटकलें
साधना सिंह का अचानक डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के आवास पर पहुंचना और उनके साथ आत्मीय संवाद करना चंदौली की राजनीति में बड़े सियासी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर पुरानी कड़वाहट को भुलाकर नए सिरे से तालमेल बिठाने की यह एक बड़ी कोशिश हो सकती है।