जनसेवक नहीं ‘विधायक-सेवक’ व ‘भाजपा-सेवक’ हो गए हैं अफसर, जनता बजाएगी बैंड : मनोज सिंह

tds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_show वैसे तो कहा जाता है कि जेल जाने से राजनीतिक आंदोलन करने वाले नेताओं का कद बढ़ जाता है और इसीलिए राजनेता राजनीतिक आंदोलनों में गिरफ्तार होने और जेल जाने से नहीं डरा करते हैं। पर जब आंदोलन किसी राजनीतिक रंजिश का शिकार होने लगता है तो कभी-कभी राजनेता और पार्टी के कार्यकर्ताओं के मन
 

tds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_show

वैसे तो कहा जाता है कि जेल जाने से राजनीतिक आंदोलन करने वाले नेताओं का कद बढ़ जाता है और इसीलिए राजनेता राजनीतिक आंदोलनों में गिरफ्तार होने और जेल जाने से नहीं डरा करते हैं। पर जब आंदोलन किसी राजनीतिक रंजिश का शिकार होने लगता है तो कभी-कभी राजनेता और पार्टी के कार्यकर्ताओं के मन में भी तरह-तरह की आशंका ही उत्पन्न होने लगती हैं। कुछ इसी तरह की आशंका पिछले 1 सप्ताह में दो बार गिरफ्तार करके जेल भेजे गए मनोज सिंह डब्लू के भी मन में दिखती है।

चंदौली समाचार से बातचीत करते हुए मनोज सिंह ने बताया कि वह किसानों के हित की लड़ाई हमेशा लड़ते रहेंगे और इसके लिए एक-दो बार क्या 100 बार भी जेल जाना पड़े तो वह एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। वह तो जानते ही हैं कि जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी किसके इशारे पर क्या कर रहे हैं। अगर उन्हें जानबूझकर भी निशाना बनाया जा रहा है तो भी वह आंदोलन करने की अपनी आदत से बाज नहीं आएंगे। जब जहां और जैसे किसानों गरीबों या अन्य मुद्दों पर आंदोलन की जरूरत पड़ेगी वह पुलिस और प्रशासन की सारी बंदिशें से तोड़कर बाहर निकलेंगे और मौके पर जाएंगे और उनकी लड़ाई के लिए जो भी बन पड़ता हो करेंगे।

काफी शर्मनाक है प्रशासनिक अफसरों का काम

आंदोलन के दौरान जेल भेजने के समय पुलिस ने जो भी हरकत उनके साथ की वह काफी शर्मनाक है। जिम्मेदार पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को यह शोभा नहीं देता है। लोग अफसरों पर भरोसा करते हैं और उनकी बात को इसलिए मानते हैं कि वह जनसेवक कहे जाते हैं और उनका लक्ष्य जनता के दुख दर्द को समझना होता है। पर चंदौली जिले में ऐसा नहीं हो रहा है यहां के अफसर अब ‘विधायक सेवक’ व ‘भाजपा-सेवक’ हो गए हैं। उनका बाकी लोगों से कोई लेना देना नहीं है।

नेताओं के लिए भी खतरे की घंटी

चंदौली समाचार से खास बातचीत में उन्होंने चर्चा करते हुए बताया कि पहली बार जब उन्हें धीना से गिरफ्तार किया गया तो उन्हें तरह-तरह की बातें बना कर पहले तो बरगलाया गया और फिर जिले के कई इलाकों में घुमाते हुए उन्हें जेल भेजा गया। इस दौरान मेडिकल कराने के बाद जिस तरह से प्रशासन में जेल भेजने में कई मनगढ़ंत कहानियां रची और लोगों को बरगलाने का काम किया उसे लोग जान चुके हैं। पुलिस और प्रशासन कहीं ना कहीं राजनीतिक आंदोलनों को कुछ सत्ताधारी पार्टी के लोगों के इशारे पर दबाने का काम कर रहा है। यह अधिकारियों के साथ-साथ उन नेताओं के लिए भी खतरे की घंटी है।

विरोधी दल के नेताओं को कुचलने की कोशिश

दो दिन बाद ही दोबारा उन्हें चंदौली से गिरफ्तार करके बबुरी ले जाते समय पहले गाड़ी को गड्ढे में गिराया गया। उसके बाद बबुरी से चकिया ले जाकर मेडिकल कराया गया। पहले अकेले जेल भेजने की कोशिश की गई और विरोध करने पर फिर 5 कार्यकर्ताओं के साथ जेल भेजा गया। वहां पहुंचने के बाद 2 दिनों तक जमानत के लिए जिस तरह तरह की दलीलें दी गई, उससे कहीं ना कहीं साफ लगता है कि अधिकारियों पर सत्तादल के नेताओं का दबाव है और विरोधी दल के नेताओं को कुचलने का आदेश दिया जा रहा है। दबाव में काम करने वाले पुलिस के अधिकारियों की नीयत ठीक नहीं है और वह खुद सत्ता पक्ष के एजेंट की तरह बर्ताव और व्यवहार कर रहे हैं।

‘अपराधी’ बनाने की कोशिश होगी नाकाम

मनोज सिंह ने साफ साफ कहा कि वह खुद आने वाले दिनों में इस बात के लिए एक और बड़ी लड़ाई शुरू करेंगे, जिससे उन तथाकथित राजनेताओं की भी पोल खुल जाएगी, जो क्षेत्र में जनता के मुद्दों पर पहले तो खुद चुप्पी साधे रहते हैं और जब विरोधी दल के नेता या कार्यकर्ता काम करते हैं तो उनको जेल भिजवाकर अपने तरह ‘अपराधी’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के बड़े नेताओं के चेहरे के पीछे चुनाव जीतकर जनता को बरगलाने का काम करने वाले नेताओं को आने वाले चुनाव में सबक सिखाने का काम करूंगा।

पंचायत चुनाव में दिखाउंगा दम

मनोज सिंह ने कहा कि आने वाले पंचायत चुनाव में भी उन राजनेताओं को इस बात का पता लग जाएगा कि जनता उनका कैसे बैंड बजाती है। मैं खुद सैयदराजा इलाके में ऐसे उन तमाम लोगों का आवाहन करता हूं कि किसानों और गरीबों के मुद्दे पर लोगों का ध्यान भटकाने वाली भारतीय जनता पार्टी और उसके तथाकथित किसान प्रेमी नेताओं को सबक सिखाने का काम करें ताकि क्षेत्र के लोगों का शोषण ना हो और विकास के काम को गति मिल सके।