कम हो रहा है BJP नेताओं का भौकाल, विपक्षी नेताओं की तरह रिक्वेस्ट मूड में सांसद साधना सिंह, पीड़ितों की मदद के लिए सौंप रहीं लेटर 

चंदौली में बाढ़ के कारण हजारों हेक्टेयर फसल तबाह होने के बाद राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपा है। उन्होंने किसानों के लिए राहत-मुआवजे और नदी सफाई कार्य में लापरवाही की जांच कराने की मांग उठाई है।

 

बाढ़ से हजारों हेक्टेयर फसल फिर होगी बर्बाद

विपक्षी नेताओं की तरह हो गयी है सांसद साधना सिंह की स्थिति

एक्शन के बजाय रिक्वेस्ट और निर्देश के माडल पर काम कर रहे भाजपा नेता

बतानी चाहिए तारीख- कब तक मिलेगा कितना मुआवजा

कब तक होगी नदी सिल्ट सफाई की जांच और कार्रवाई 

चंदौली जिले में चंद्रप्रभा और गड़ई नदियों में आई भीषण बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। नियामताबाद, चकिया, मुगलसराय और बबुरी के इलाकों में हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं जिससे वे बर्बाद हो गई हैं। किसानों की इस बड़ी मुसीबत को देखते हुए राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने सख्ती से मदद का काम शुरू कराने की जगह कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को एक कागजी पत्र सौंपा और प्रशासन से किसानों की मदद करने का अनुरोध किया। ऐसा लगता है कि भाजपा नेताओं की हनक जिले में कमजोर होती जा रही है और वे अफसरों के सामने रिक्वेस्ट मूड में नजर आ रहे हैं। इसके पहले भाजपा नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष और खुद को किसानों का नेता कहने वाले राणा प्रताप सिंह ने भी पत्र सौंपा था।

जिले में फिर से बाढ़ की मार और अन्नदाता लाचार
सांसद साधना सिंह ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि फसलें पूरी तरह पानी में डूब जाने से किसानों के सामने बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से गुजारिश की है कि वे प्रभावित इलाकों का तुरंत सर्वे कराएं। साथ ही, किसानों को बिना किसी देरी के राहत सामग्री उपलब्ध कराने और फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने का काम तेजी से शुरू करें ताकि इस मुसीबत की घड़ी में किसानों को बड़ा सहारा मिल सके।

नदी सफाई अभियान पर बड़े सवाल
इस पत्र के जरिए सांसद ने सिंचाई विभाग द्वारा कराए गए नदी की खुदाई और सिल्ट सफाई के काम पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 'एक जनपद, एक नदी' अभियान के तहत चंद्रप्रभा और गड़ई नदियों में गाद हटाने व खुदाई का काम कराया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यही था कि लगभग 7,200 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को जलभराव के संकट से बचाया जा सके।

सफाई के नाम पर खानापूर्ति की आशंका
सांसद का सीधा आरोप है कि सिंचाई विभाग ने नदी की सफाई का काम तय नियमों और मापदंडों के अनुसार नहीं किया। यही वजह है कि इतना काम होने के बावजूद यह पूरा इलाका दोबारा पानी में डूब गया और फसलें बर्बाद हो गईं। उन्होंने इसे काम में भारी लापरवाही का संकेत बताया और कहा कि अगर नदी की सफाई सही तरीके से की गई होती तो आज पानी का स्तर इस तरह खेतों तक नहीं पहुंचता।

अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग
साधना सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि नदी की खुदाई और सिल्ट सफाई में हुई कथित अनियमितताओं की पूरी निष्पक्षता से जांच कराई जाए। जांच में यदि कोई भी अधिकारी या ठेकेदार दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसानों और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा करना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

आपको याद होगा इसके पहले भाजपा नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष और खुद को किसानों का नेता कहने वाले राणा प्रताप सिंह ने भी पत्र सौंपा था। हालांकि राणा प्रताप सिंह ने 2 महीने पहले नदियों की खुदाई को लेकर बड़ा भौकाल बनाया था और करोड़ों खर्च करके किसानों की फसल बचाने की पहल के लिए खूब वाहवाही लूटी थी, लेकिन इतना खर्च होने के बाद भी अबकी बार फिर से किसानों का नुकसान होना तय है।