चंदौली में कई साल बाद GT रोड थानों का जातिगत समीकरण बदला, तीन पर सिंह साहब तो एक पर मिश्रा जी का कब्जा, मुगलसराय अलीनगर सदर कोतवाली और सैयदराजा में नई तैनाती
GT रोड थानों का समीकरण बदला
तीन थानों पर सिंह साहब काबिज
एक थाने पर मिश्रा जी का कब्जा
सदर कोतवाली में त्रिवेणी सिंह तैनात
कई साल बाद टूटा जातिगत वर्चस्व
चंदौली जिले के चर्चित और महत्वपूर्ण थानों में शामिल मुगलसराय, अलीनगर, चंदौली की सदर कोतवाली और सैयदराजा थाने में कई साल बाद जातिगत समीकरणों का पुराना वर्चस्व टूटता नजर आ रहा है। इन थानों पर लंबे समय से खास जातिगत समीकरणों के आधार पर प्रभारी की तैनाती को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
ऐसा देखा जाता रहा है कि जिस जाति के वर्चस्व की सरकार रहती थी, उस जाति के वर्चस्व वाले थानेदार जीटी रोड के थानों पर रहते थे। जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो यादव जाति के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर जीटी रोड पर तैनाती बहुत आसानी से पाए जाते थे। जब मायावती की सरकार आई तो दलित वर्ग के थानेदारों को जीटी रोड पर अपना जलवा बुलंद करते देखा गया। अब जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तो जीटी रोड पर क्षत्रिय और ब्राह्मण वर्ग को खुश करने के लिए जीटी रोड के चार थानों में से दो पर क्षत्रिय और दो पर ब्राह्मण थानेदार या इंस्पेक्टर तैनात किए जाते रहे हैं ताकि बैलेंस बराबर रहे और एक खास तरह का संदेश दिया जा सके।
लेकिन अबकी बार जैसे ही चंदौली के कोतवाल बिंदेश्वरी प्रसाद पांडे को हटाया गया तो उनके जगह ब्राह्मण की तैनाती न करते हुए त्रिवेणी सिंह को कमान सौंप गई। इससे पुराना बैलेंस बिगड़ गया और नया समीकरण बन गया। बताया जाता है कि इन चार प्रमुख थानों में दो थानों की कमान ठाकुर बिरादरी के इंस्पेक्टरों और दो थानों की जिम्मेदारी पंडित बिरादरी के अधिकारियों को मिलने का समीकरण बना रहता था। हालांकि, हालिया पुलिस फेरबदल के बाद यह तस्वीर बदल गई है।
तीन पर सिंह साहब, एक पर मिश्रा जी
वर्तमान में मुगलसराय, अलीनगर और सदर कोतवाली की कमान सिंह साहब के हाथ में है, जबकि सैयदराजा थाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर मिश्रा जी संभाल रहे हैं। इस बदलाव को जिले में बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। पहले दो-दो का बैलेंस रहता था, लेकिन अब तीन-एक का समीकरण हो गया है।
नेशनल हाईवे से जुड़े इन महत्वपूर्ण थानों में हुए बदलाव को पुलिस महकमे में नई व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। कई साल बाद बदले इस समीकरण को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग कह रहे हैं कि अब जीटी रोड के थानों पर सिंह साहबों का दबदबा बढ़ गया है।
पुलिस महकमे के जानकारों का कहना है कि जीटी रोड के ये चारों थाने सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि ये नेशनल हाईवे से जुड़े हैं। यहां अपराध भी ज्यादा होता है और राजनीतिक दबाव भी। इसलिए यहां तैनाती को लेकर हमेशा जातिगत समीकरण का ध्यान रखा जाता है। लेकिन इस बार समीकरण बदलने से कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।