इसलिए रौबदार मूंछों का क्रेज हुआ खत्म,  चंदौली के सिपाही से इंस्पेक्टर तक किसी को नहीं मिलता 'मूंछ भत्ता'

कभी मूंछें पुलिस की शान और पहचान हुआ करती थीं, लेकिन चंदौली जिले में यह परंपरा दम तोड़ती दिख रही है। जिले के 1705 पुरुष पुलिसकर्मियों में से एक भी ऐसा नहीं है जो मानक के अनुरूप मूंछें रखकर मिलने वाला भत्ता प्राप्त कर रहा हो।

 

मूंछों पर ताव देने का भत्ता बंद

250 रुपये प्रति माह मिलता है भत्ता

जिले में एक भी दावेदार नहीं मिला

पुलिस की पहचान से गायब हुई मूंछें

पुलिसिया रौब से गायब हुई मूंछें: चंदौली में भत्ते के पात्र नहीं मिल रहे पुलिसकर्मी

कभी उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान उनके चेहरे पर ताव देती लंबी और रौबदार मूंछों से हुआ करती थी। भारी आवाज और शानदार कद-काठी के साथ मूंछें पुलिसिया हनक को और बढ़ा देती थीं। इसी गरिमा को बनाए रखने के लिए विभाग में मूंछों के रखरखाव के लिए विशेष भत्ता देने का प्रावधान है। लेकिन चंदौली जनपद से एक हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। जिले में तैनात इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक, वर्तमान में एक भी ऐसा पुलिसकर्मी नहीं है जो मानक के अनुरूप मूंछें रखता हो और इस भत्ते का लाभ उठा रहा हो।

भत्ते की राशि बढ़ी पर घट गया मूंछों का क्रेज
विभाग में मूंछों को मेंटेन करने के लिए मिलने वाले भत्ते के नियमों में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2019 से पहले यह भत्ता मात्र 50 रुपये प्रति माह हुआ करता था, जिसे बढ़ाकर अब 250 रुपये कर दिया गया है। चंदौली जिले में वर्तमान में 48 इंस्पेक्टर, 372 सब-इंस्पेक्टर, 589 हेड कांस्टेबल और 696 कांस्टेबल सहित कुल 1705 पुरुष पुलिसकर्मी तैनात हैं। इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद विभाग के रिकॉर्ड में एक भी नाम ऐसा नहीं है जिसे इस भत्ते का भुगतान किया जा रहा हो। नई पीढ़ी के पुलिसकर्मियों में क्लीन शेव या छोटी मूंछें रखने का बढ़ता चलन इस प्राचीन परंपरा को खत्म कर रहा है।

अंग्रेजी शासन काल से जुड़ी है इस भत्ते की जड़ें 
पुलिस विभाग में मूंछों के लिए भत्ता देने की शुरुआत अंग्रेजी हुकूमत के दौरान हुई थी। उस दौर में मूंछों को अनुशासन और साहस का प्रतीक माना जाता था। वर्दी के साथ एक विशेष आकार की मूंछ रखने वाले पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त सम्मान और वित्तीय लाभ दिया जाता था। आज भी पुलिस नियमावली में इसका उल्लेख है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और ग्रूमिंग के नए मानकों के कारण पुलिस का वह पुराना 'मूंछों वाला अवतार' अब केवल पुरानी तस्वीरों या फिल्मों तक ही सीमित रह गया है।

पुलिस अधीक्षक की दलील
इस रोचक विषय पर जानकारी देते हुए चंदौली के पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने बताया कि जिले में वर्तमान में किसी भी पुलिसकर्मी को मूंछों के नाम पर भत्ता नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भत्ता तभी मिलता है जब पुलिसकर्मी विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप मूंछें रखें और उसके लिए आवेदन करें। चूंकि जिले में किसी भी पुलिसकर्मी की मूंछें उन मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, इसलिए यह बजट खर्च नहीं हो रहा है। आलाधिकारियों का भी अब इस ओर अधिक ध्यान नहीं रहता, जिसके चलते यह परंपरा धीरे-धीरे विस्मृत होती जा रही है।