एक दिन की और छुट्टी, भारी बारिश के बीच शिक्षकों को स्कूल बुलाने का आदेश बेतुका, घर से भी हो सकता है ऑनलाइन काम
भारी बारिश के बीच शिक्षकों की अनिवार्यता
चंदौली में स्कूलों की छुट्टी का आदेश
ऑनलाइन होने वाले काम के लिए स्कूल
मौसम विभाग के अलर्ट के बाद भी आदेश
चंदौली जनपद सहित पूरे पूर्वांचल में मौसम विभाग लगातार भारी बारिश का अलर्ट जारी कर रहा है। अगले 5 दिनों तक मूसलाधार बारिश की संभावना को देखते हुए बाकायदा चेतावनी भी दी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में 1 सितंबर को एक और नया आदेश जारी कर 2 सितंबर को भी जिले के सभी स्कूलों को बंद रखने की घोषणा की गई थी। कल भी एक आदेश करके एक दिन की छुट्टी की गयी थी। जब 5 दिन का अलर्ट है तो एक-एक दिन की छुट्टी क्यों बढ़ायी जा रही है।
बच्चों की छुट्टी पर शिक्षकों की उपस्थिति
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि भारी वर्षा और जलभराव को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के सभी बोर्ड के स्कूल बंद रहेंगे। हालांकि, इसी आदेश में यह भी निर्देश दिया गया कि सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित रहकर अपार आईडी, डीबीटी और यू-डायस से जुड़े विभागीय कार्यों को पूरा करेंगे। इस दोहरे आदेश के बाद शिक्षा विभाग के भीतर और शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
शिक्षकों और बुजुर्ग कर्मियों की सुरक्षा पर सवाल
शिक्षक नेताओं और स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि जब मौसम इतना खराब है और भारी बारिश का रेड अलर्ट है, तो शिक्षकों को जबरन स्कूल क्यों बुलाया जा रहा है। जिले में कई ऐसे बुजुर्ग शिक्षक और कर्मचारी हैं जिनकी उम्र 50 साल से अधिक है। ऐसे में यदि रास्ते में जलभराव या दुर्घटना के दौरान कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? दूर-दराज के इलाकों में बने विद्यालयों तक पहुँचने के रास्ते वैसे ही खराब और कीचड़ भरे होते हैं।
घर से भी हो सकते हैं ऑनलाइन काम
शिक्षकों का तर्क है कि अपार आईडी, डीबीटी और अन्य पोर्टल से जुड़े अधिकांश काम ऑनलाइन हैं, जिन्हें आसानी से घर बैठकर भी किया जा सकता है। जब बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल बंद हैं, तो सिर्फ कागजी और ऑनलाइन कामों के लिए शिक्षकों को जोखिम में डालकर स्कूल बुलाना कहाँ की समझदारी है। अधिकारी तो चार पहिया वाहनों से दफ्तर पहुँच जाते हैं, लेकिन आम शिक्षकों को भारी बारिश में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिम्मेदारों से सवाल और विरोध
इस तरह के आदेशों के चलते कई शिक्षकों में भारी रोष है और वे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। शिक्षकों ने मांग की है कि जब तक मौसम सामान्य नहीं हो जाता, तब तक इस तरह के जोखिम भरे आदेशों पर रोक लगनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।