इलिया में सरकारी ठेकेदारों की दबंगई: बिना पूछे किसानों के खेत से JCB से खोदी मिट्टी, अंतरराज्यीय गेट निर्माण पर बवाल

चंदौली के इलिया-लेवा मार्ग पर बन रहे अंतरराज्यीय प्रवेश द्वार के निर्माण में ठेकेदारों द्वारा बिना अनुमति किसानों के खेतों से जबरन मिट्टी काटने का मामला सामने आया है। अधिकारियों ने गलती स्वीकारते हुए जांच की बात कही है।
 

किसानों के खेत से जबरन मिट्टी खोदी

अंतरराज्यीय प्रवेश द्वार पर भारी बवाल

एई बोले—जेई से हुई बड़ी गलती

किसानों की उपजाऊ जमीन हुई असमतल

मुआवजे और बहाली की उठी मांग

चंदौली जिले के इलिया कस्बा स्थित इलिया-लेवा मार्ग पर इन दिनों सरकारी विकास कार्यों के नाम पर एक अनोखा और हैरान करने वाला विवाद खड़ा हो गया है। यहाँ कस्बे में बनाए जा रहे भव्य अंतरराज्यीय प्रवेश द्वार के निर्माण में जुटे ठेकेदारों और कर्मचारियों पर दबंगई का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि विकास की आड़ में उनके साथ सीधे तौर पर अन्याय किया जा रहा है और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उनकी निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

बिना पूछे खेतों में घुसा दी जेसीबी मशीन
पीड़ित किसान विजय गुप्ता, रमेश चंद्र गुप्ता, संजय गुप्ता, शिवधनी गुप्ता, मनोज गुप्ता, अनुज गुप्ता और सुधीर गुप्ता सहित अन्य भूमिधरों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनकी इस कीमती भूमि पर सालों से नियमित रूप से खेती-किसानी होती आ रही है। आरोप है कि प्रवेश द्वार के फाउंडेशन (नींव) निर्माण के लिए भारी मात्रा में भराव की जरूरत थी। इसे पूरा करने के लिए निर्माण कार्य से जुड़े लोगों ने बिना किसी पूर्व सूचना या किसानों की सहमति के, रातों-रात जेसीबी मशीनें लगाकर खेतों की उपजाऊ मिट्टी को बेरहमी से खोद डाला और उसे निर्माण स्थल पर डाल दिया।

फसल की बुवाई और सिंचाई का संकट गहराया
खेतों से मनमाने तरीके से मिट्टी काटे जाने के कारण उपजाऊ जमीन पूरी तरह से असमतल और उबड़-खाबड़ गड्ढों में तब्दील हो गई है। किसानों का कहना है कि जमीन का लेवल बिगड़ने की वजह से अब आने वाली नई फसल की बुवाई और खेतों की सिंचाई करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इससे उनकी खेती को तो भारी आर्थिक नुकसान होगा ही, साथ ही भविष्य में अनाज के उत्पादन पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। आक्रोशित किसानों ने इसे अपनी निजी भूमि पर अवैध कब्जा और प्रशासनिक हस्तक्षेप बताते हुए उच्चाधिकारियों से तुरंत कार्रवाई की गुहार लगाई है।

यथास्थिति बहाल करने और मुआवजे की मांग
पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उनके खेतों की मिट्टी को भरकर जमीन को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाए। इसके साथ ही, बिना अनुमति के निजी खेतों में जबरन घुसने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई हो और अब तक हुए नुकसान का सही आकलन कर पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी जमीन ठीक नहीं होती, उनका विरोध प्रदर्शन और नाराजगी लगातार जारी रहेगी।

सहायक अभियंता ने स्वीकारी विभाग की बड़ी भूल
इस पूरे मामले के गरमाने के बाद लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता (एई) भूपेंद्र सिंह ने कैमरे के सामने आकर विभाग की बड़ी लापरवाही को स्वीकार किया है। उन्होंने माना कि किसी भी सूरत में किसानों की निजी भूमि से बिना इजाजत मिट्टी कटवाना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। एई भूपेंद्र सिंह ने कहा, "इस पूरे प्रकरण में हमारे जूनियर इंजीनियर (जेई) की पूरी तरह से गलती सामने आई है। उन्हें इस तरह बिना अनुमति लिए किसी के खेत से मिट्टी नहीं उठवानी चाहिए थी। जिन भी किसानों के साथ यह हुआ है, वह गलत है। मामले की जानकारी मिलते ही काम रुकवा कर संबंधित लोगों को कड़े निर्देश दे दिए गए हैं, और बहुत जल्द मौके पर जाकर किसानों की इस समस्या का मुकम्मल समाधान कराया जाएगा।"