जिले में फैल रही हैं लंपी बीमारी,  पशु चिकित्सालय से तत्काल करें संपर्क

लंपी से बचाव में ivermectin का प्रयोग अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है। यह दवा तीन महीने के भीतर दी जाए तो पशु संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।
 

बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है बीमारी

पशुपालकों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता

गंदगी और पानी के जमाव वाले स्थानों पर ज्यादा फैलती है बीमारी

चंदौली जिले में लंपी रोग इस समय बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुका है और चंदौली जैसे सीमावर्ती जिलों में पशुपालकों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह रोग मुख्य रूप से मक्खी और मच्छरों द्वारा फैलता है, जो गंदगी और पानी के जमाव वाले स्थानों पर पनपते हैं। संक्रमित कीड़े स्वस्थ पशु को काटते हैं और वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसलिए सबसे पहला और प्रभावी उपाय है पशुशालाओं में स्वच्छता बनाए रखना, नालियों की सफाई करना और कहीं भी पानी का जमाव न होने देना।

लंपी से बचाव में ivermectin का प्रयोग अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है। यह दवा तीन महीने के भीतर दी जाए तो पशु संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। इसके साथ ही पशुओं को अच्छा चारा और शुद्ध पानी उपलब्ध कराना जरूरी है क्योंकि स्वस्थ और पोषित पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। कमजोर या कुपोषित पशु जल्दी संक्रमित हो जाते हैं।

यदि किसी पशु में लंपी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अलग कर देना चाहिए और आसपास सफाई व छिड़काव करना चाहिए। बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय पहले से रोकथाम करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, ivermectin की खुराक, और पशुशाला को हवादार और साफ-सुथरा रखना तीन सबसे प्रभावी कदम हैं।

पशुपालकों को चाहिए कि वे निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क कर समय-समय पर अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएँ। सच यह है कि इलाज महंगा और कठिन होता है जबकि रोकथाम सरल और प्रभावी। इसलिए हर पशुपालक को चाहिए कि बीमारी का इंतजार न करें, बल्कि पहले से सावधानी बरतकर अपने पशुओं को सुरक्षित रखें। यही सच्ची समझदारी और लंपी से बचाव का सबसे आसान समाधान है।

इस संबंध में पशु चिकित्सक ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित जानवरों को सबसे पहले तो इलाज कराना जरूरी है और उसके साथ ही साथ वायरल होने के कारण इनकी रखरखाव की भी जरूरत पड़ती है।