PM मोदी और CM योगी का असर: भदोही सांसद ने छोड़ा लग्जरी काफिला, अब फॉर्च्यूनर से नहीं. ई-रिक्शा से जाएंगे अस्पताल

 

 प्रधानमंत्री मोदी के ईंधन बचाओ और मुख्यमंत्री योगी के सादगी संदेश को अपनाते हुए भदोही सांसद डॉ. विनोद बिंद ने अपना तीन गाड़ियों का काफिला त्याग दिया। शनिवार को वह ई-रिक्शा से अपने अस्पताल पहुंचे, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।

 
 

ई-रिक्शा से पहुंचे अपने अस्पताल

तीन गाड़ियों का काफिला छोड़ा

पीएम-सीएम की अपील का असर

पर्यावरण और ईंधन बचाओ संदेश

सादगी ने जीता लोगों का दिल

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार की जा रही अपील तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जनप्रतिनिधियों को सादगी अपनाने के निर्देशों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में भदोही के सांसद डॉ. विनोद बिंद ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। शनिवार सुबह वह अपने लग्जरी वाहनों के काफिले को छोड़कर एक आम नागरिक की तरह ई-रिक्शा (टोटो) पर सवार होकर अपने अस्पताल पहुंचे।

काफिला छोड़ ई-रिक्शा पर हुए सवार सांसद 
भाजपा सांसद डॉ. विनोद बिंद शनिवार सुबह मुगलसराय स्थित अपने कैलाशपुरी आवास से गोधन स्थित अपने निजी अस्पताल के लिए निकले। आम तौर पर उनके साथ दो फॉर्च्यूनर और एक स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियों का लंबा काफिला चलता था, लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल अलग था। सांसद को ई-रिक्शा से सफर करते देख रास्ते में लोग हैरान रह गए। इस दौरान उन्होंने आम जनता का अभिवादन भी स्वीकार किया, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

संघर्षपूर्ण रहा है सांसद का सफरनामा
 मूल रूप से धानापुर क्षेत्र के कावई-पहाड़पुर गांव के निवासी डॉ. विनोद बिंद का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में नाम कमाया और वर्ष 2007 में गोधन मोड़ के पास "रमा देवी ट्रामा सेंटर" की स्थापना की थी। बाद में वह राजनीति में सक्रिय हुए और पहले विधायक और फिर 2024 में भाजपा के टिकट पर भदोही से सांसद चुने गए। सांसद बनने के बाद भी उनकी इस सादगी ने समर्थकों और स्थानीय लोगों को प्रभावित किया है।

जनता के बीच गया सकारात्मक संदेश
 राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सांसद के इस कदम को केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों और सादगी के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं ऐसे उदाहरण पेश करते हैं, तो इससे आम जनता के बीच ईंधन बचाने और फिजूलखर्ची कम करने का एक बहुत ही सकारात्मक संदेश जाता है। उनके समर्थकों का कहना है कि सांसद बनने के बाद भी डॉ. बिंद का जमीन से जुड़ाव और सादगी बरकरार है।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि सांसद जी कितने दिनों तक ऐसे सफर करते हैं। साथ ही शादी-विवाह व अन्य आयोजनों में कैसे आते जाते हैं।