नौगढ़ में प्रेम कहानी का अनोखा अंत: घर से भागे प्रेमी-प्रेमिका को प्रधान ने पंचायत में बनवाया भाई-बहन, बंधवाई राखी
नौगढ़ के गांव में प्रेम कहानी का सबसे अनोखा मोड़
पंचायत में प्रेमी जोड़े को प्रधान ने दिलवाया भाई-बहन का दर्जा
युवती ने युवक की कलाई पर बांधी पवित्र राखी
एक महीने बाद भी गांव की चौपालों पर फैसले की गूंज
सामाजिक सौहार्द और मर्यादा बनाए रखने के लिए बड़ा कदम
चंदौली के इस गांव में पंचायत का ऐतिहासिक फैसला: एक महीने बाद भी चौपालों पर गूंज रही प्रधान की पहल, युवाओं को दी नसीहत
प्यार, तकरार और फिर घर से फरार होने की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन चंदौली जिले के वनांचल क्षेत्र नौगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। यहाँ प्यार में घर छोड़कर भागे एक युवक-युवती की कहानी में पंचायत ने ऐसा मोड़ ला दिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
ग्राम प्रधान की अगुवाई में बैठी पंचायत ने समाज के ताने-बाने को बचाने के लिए एक अनोखा रास्ता निकाला। पंचायत के हुक्म के बाद युवती ने युवक की कलाई पर पवित्र राखी बांध दी। इसके बाद दोनों को हमेशा के लिए भाई-बहन का रिश्ता पवित्रता से निभाने की कसम दी गई। इस अनोखे फैसले को आए एक महीना बीत चुका है, लेकिन आज भी इसकी गूंज शांत नहीं हुई है।
घर से भागने की चर्चा से लेकर पंचायत के बड़े फैसले तक का सफर
दरअसल, इस युवक और युवती के बीच चल रहे प्रेम संबंध की बातें लंबे समय से पूरे गांव में फैली हुई थीं। बात तब और ज्यादा बिगड़ गई जब दोनों अचानक अपने-अपने घर छोड़कर कहीं चले गए। इस घटना के बाद दोनों के परिवारों में भारी बेचैनी फैल गई और गांव के लोग भी तरह-तरह की बातें बनाने लगे।
काफी खोजबीन के बाद जब दोनों को वापस गांव लाया गया, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे पंचायत बुलाई गई। पूरे गांव की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि आखिर इस सामाजिक विवाद का हल क्या निकलेगा। पंचायत में घंटों तक दोनों पक्षों की बातें सुनी गईं और फिर प्रधान ने गांव की एकता को ध्यान में रखकर अपना फैसला सुनाया।
मर्यादा और समाज का सम्मान सबसे ऊपर: ग्राम प्रधान
पंचायत के इस फैसले को लेकर जब चर्चाएं तेज हुईं, तो ग्राम प्रधान ने अपनी बात खुलकर सामने रखी। उन्होंने कहा कि गांव का शांतिपूर्ण माहौल और हमारी सामाजिक मर्यादा ही सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं को अपने जोश में आकर परिवार और समाज के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। नई पीढ़ी को भाईचारे और अनुशासन का संदेश देना ही इस पंचायत का मुख्य मकसद था।
ग्रामीणों का भी यही कहना है कि इस पूरी पंचायत का उद्देश्य किसी भी परिवार या बच्चे को समाज में नीचा दिखाना या अपमानित करना बिल्कुल नहीं था। बल्कि मकसद यह था कि विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाए और गांव में किसी भी तरह का तनाव न रहे। यही वजह है कि इसे इलाके के लोग एक मिसाल के तौर पर देख रहे हैं।
एक महीने बाद भी चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा गरम
इस अजीबोगरीब और अनोखे फैसले को आए भले ही पूरा एक महीना गुजर चुका है, लेकिन आज भी नौगढ़ की बाजारों, चाय की दुकानों और गांव की चौपालों पर इसी बात की बहस चलती रहती है। लोग इस पर अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं, जिससे यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
गांव के कुछ बुजुर्ग और प्रबुद्ध लोग इसे प्रधान की सूझबूझ, बेहतरीन सामाजिक नेतृत्व और समझदारी का एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे ग्रामीण समाज को अनुशासन में रखने की एक नई और अनोखी पहल के रूप में देख रहे हैं। बहरहाल, नौगढ़ के इस गांव का यह फैसला एक सामान्य पंचायत के निर्णय से कहीं आगे निकलकर आज एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बन चुका है।