कोर्ट के आदेश का चंदौली में दिखेगा असर, अब आवारा कुत्तों की होगी नसबंदी और टीकाकरण

राजकीय पशु चिकित्सालयों में पालतू कुत्तों का टीकाकरण पहले से किया जाता है, लेकिन अब शासन से गाइडलाइन मिलने के बाद आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन भी शुरू किया जाएगा।
 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार की पहल

21वीं पशु गणना में कुत्ते भी होंगे शामिल

शासन से गाइडलाइन के बाद शुरू होगी नसबंदी प्रक्रिया

गांवों तक पहुंचेगी ये नयी व्यवस्था

चंदौली जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार को देखते हुए अब उनकी नसबंदी और टीकाकरण की तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस दिशा में कदम उठाया है। 21वीं पशु गणना में इस बार कुत्तों को भी शामिल किया गया है। महीने के अंत तक जिले में इनकी सटीक संख्या स्पष्ट हो जाएगी। पशुपालन विभाग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में अनुमानित 25 हजार से अधिक आवारा कुत्ते मौजूद हैं।

आपको बता दें कि राजकीय पशु चिकित्सालयों में पालतू कुत्तों का टीकाकरण पहले से किया जाता है, लेकिन अब शासन से गाइडलाइन मिलने के बाद आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन भी शुरू किया जाएगा। पशु चिकित्सक डॉ. सुजीत सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में भोजन की कमी से कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। हाल ही में नौगढ़ के कंपोजिट स्कूल में 23 अगस्त को एक आवारा कुत्ते ने 11 वर्षीय छात्र मेराज पर हमला कर दिया था।

पंचायती राज विभाग के अनुसार, फिलहाल ग्राम पंचायतों में कुत्तों को पकड़ने या उनके रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। यदि कोई कुत्ता खूंखार या रेबीज से ग्रस्त होता है, तो जिला प्रशासन निकायों के माध्यम से उसे पकड़वाता है और पशुपालन विभाग उसका उपचार करता है।

उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेके चौहान ने बताया कि बारिश और प्रजनन काल के चलते कुत्तों की संख्या और व्यवहार दोनों समस्याएं बन रहे हैं। भोजन न मिलने पर वे राह चलते लोगों, खासकर महिलाओं, बच्चों और बाइक सवारों का पीछा करने लगते हैं। कई परिवार छोटे बच्चों को अकेले घर से बाहर नहीं भेज रहे हैं। अभिभावक बच्चों को स्कूल और बस स्टॉप तक खुद छोड़ने के लिए मजबूर हैं।

डॉ. चौहान ने रेबीज रोग पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी कुत्ते को रेबीज हो जाए तो वह "पागल कुत्ता" कहलाता है। यह वायरस स्नायु तंत्र पर हमला करता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। कुत्ता उत्तेजित होकर बिना कारण काटने लगता है और उसके मुंह से झाग निकलता है। ऐसे कुत्ते एक सप्ताह के भीतर मर जाते हैं, इसलिए समय रहते बचाव जरूरी है।

जिला पंचायत राज अधिकारी नीरज सिन्हा ने कहा कि आवारा कुत्तों को पकड़ने और सुरक्षित रखने के लिए जिलाधिकारी स्तर से पहल कराई जाएगी। इसके लिए "डॉग कैचर" खरीदने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जाएगा।