आत्मदाह की कोशिश करते ही DIOS साहब ने दे दिया वेतने जारी करने का फरमान, इसलिए रोकी थी सैलरी

 

चंदौली के सैयदराजा स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में दो महीने से वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारी संतोष मिश्रा ने आत्मदाह का प्रयास किया। शिक्षकों की तत्परता से जान बची, जिसके बाद डीआईओएस ने तुरंत वेतन जारी कर दिया।

 
 

सैयदराजा में कर्मचारी का आत्मदाह प्रयास

दो महीने से रुका था बकाया वेतन

बेटी की पढ़ाई और खर्च से परेशान

शिक्षकों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

डीआईओएस ने तुरंत दिया वेतन भुगतान आदेश

चंदौली जिले के सैयदराजा स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में बुधवार की सुबह एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। दो महीने से वेतन न मिलने के कारण भीषण आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारी संतोष मिश्रा ने विद्यालय परिसर में ही अचानक आत्मदाह का प्रयास कर लिया। गनीमत रही कि सुबह प्रार्थना सभा के समय वहां मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों ने तत्परता दिखाई। सभी ने मिलकर समय रहते संतोष को रोक लिया और एक बड़ा हादसा होने से बचा लिया।

न्यायालय का आदेश फिर भी रुक गया वेतन
मिली जानकारी के मुताबिक संतोष मिश्रा समेत एक चपरासी और दो बाबुओं का मामला साल 2012 से कोर्ट में लंबित है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 2012 से आगे के आदेश तक इन कर्मचारियों को नियमित वेतन दिए जाने का नियम लागू था। हालांकि, हाल ही में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय द्वारा कोर्ट से जुड़े मामलों की समीक्षा और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। इस जांच के नाम पर बिना पूरी जानकारी के नेशनल इंटर कॉलेज के दो चपरासियों और दो बाबुओं का एक महीने का वेतन अस्थायी तौर पर रोक दिया गया।

उधार और घर के खर्च से टूटने लगा था हौसला
परिजन और सहकर्मियों ने बताया कि लगातार दो महीने तक वेतन न मिलने से संतोष मिश्रा गहरे मानसिक और आर्थिक तनाव में आ गए थे। घर का रोजाना का खर्च चलाना, लोगों से लिया गया कर्ज चुकाना और बेटी की पढ़ाई की फीस का इंतजाम करना उनके लिए नामुमकिन हो गया था। इसी मानसिक दबाव में आकर वे 5 लीटर ज्वलनशील पदार्थ से भरा गैलन लेकर स्कूल पहुंचे और अपने ऊपर उड़ेल लिया। वहां मौजूद स्टाफ ने जैसे-तैसे उन्हें संभाला और सुरक्षित स्थान पर बैठाया।

हंगामा होते ही मौके पर पहुंचे डीआईओएस साहब
घटना की सूचना मिलते ही जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार खुद तुरंत नेशनल इंटर कॉलेज पहुंचे। उन्होंने पीड़ित कर्मचारी संतोष मिश्रा से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। डीआईओएस ने सफाई दी कि आवश्यक कागजात समय पर न मिलने और कानूनी जांच की वजह से चार कर्मचारियों का जून माह का वेतन रोका गया था। लेकिन कर्मचारी के हित को ध्यान में रखते हुए अब जून और जुलाई दोनों महीनों के वेतन के भुगतान को तत्काल मंजूरी दे दी गई है।

लापरवाही पर जांच और उठते गंभीर सवाल
डीआईओएस ने माना कि जानकारी के अभाव और विभागीय स्तर पर हुई चूक की वजह से यह नौबत आई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ पीड़ित संतोष मिश्रा का साफ कहना है कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद उनका वेतन रोककर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। अब देखना यह है कि इस जानलेवा लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।