जॉनी-जॉनी यस पापा' से बच्चों में बढ़ रहे कुसंस्कार? UP के शिक्षा मंत्री बोले-अंग्रेजी कविताओं पर अब लगेगा बैन!

 

प्रसिद्ध अंग्रेजी कविता 'जॉनी-जॉनी यस पापा' में झूठ बोलने और बड़ों का उपहास उड़ाने वाली पंक्तियों पर यूपी के शिक्षा मंत्री ने आपत्ति जताई है। वे इन कविताओं को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए केंद्र को पत्र लिखेंगे।

 
 

बच्चों के संस्कारों पर नकारात्मक प्रभाव का तर्क

'जॉनी-जॉनी' कविता में झूठ बोलने को बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखेंगे योगेंद्र उपाध्याय

भारतीय संस्कृति के प्रतिकूल पाठ्य सामग्री का विरोध

शिक्षाविदों और कुलपतियों ने जताई मंत्री से सहमति

 बच्चों के प्रारंभिक शिक्षण में वर्षों से पढ़ाई जा रही प्रसिद्ध अंग्रेजी कविताओं 'जॉनी-जॉनी यस पापा' और 'रेन-रेन गो अवे' पर उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने इन कविताओं को भारतीय संस्कारों और नैतिक मूल्यों के प्रतिकूल बताते हुए इन्हें पाठ्यक्रम से तत्काल हटाने की आवश्यकता जताई है।

संस्कारों पर नकारात्मक प्रभाव का तर्क
सोमवार को विधानभवन सभागार में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री ने इन कविताओं के निहितार्थ पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने तर्क दिया कि 'जॉनी-जॉनी यस पापा' में 'टेलिंग ए लाई? नो पापा' (क्या तुम झूठ बोल रहे हो? नहीं पापा) जैसी पंक्तियाँ बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। मंत्री के अनुसार, ऐसी पंक्तियाँ अनजाने में ही बच्चों के भीतर झूठ बोलने और फिर उसे छिपाने के कुसंस्कार पैदा करती हैं।

इसके अलावा, कविता के अंत में 'ओपन योर माउथ, हा-हा-हा' जैसी पंक्तियों को उन्होंने अनुशासनहीनता के रूप में देखा। उनका मानना है कि यह पिता या परिवार के बड़े सदस्यों के उपहास की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है, जो भारतीय पारिवारिक संरचना और सम्मान की परंपरा के सर्वथा विरुद्ध है।

केंद्रीय मंत्री को भेजा जाएगा पत्र
योगेंद्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर विषय पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को एक औपचारिक पत्र लिखेंगे। इस पत्र के माध्यम से वे आग्रह करेंगे कि देश भर के स्कूल पाठ्यक्रमों से ऐसी सामग्री को हटाया जाए जो भारतीय संस्कृति और संस्कारों को क्षति पहुँचाती हो। उन्होंने बताया कि कानपुर और लखनऊ के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान जब उन्होंने यह विचार रखा, तो वहाँ उपस्थित अधिकांश शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने उनकी इस राय का समर्थन किया।

विरोधियों और आलोचकों को जवाब
मंत्री ने अपने वक्तव्य की आलोचना करने वाले विपक्षी नेताओं और बुद्धिजीवियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विषय की गहराई को समझे बिना ही राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण विरोध कर रहे हैं। अंत में उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को शिक्षा देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शिक्षण सामग्री हमारी सांस्कृतिक विरासत और उच्च परंपराओं के अनुरूप हो।