7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन, कथावाचक आचार्य अभिषेक शास्त्री ने सुनायी कथा
श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती पर सुनायी कथा
भागवत कथा में आचार्य अभिषेक शास्त्री ने सुनाया प्रसंग
सुदामा की दोस्ती पर विशेष व्याख्यान
चंदौली जिले के चहनिया क्षेत्र के महुअर गाँव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन, रविवार को कथावाचक आचार्य अभिषेक शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की दोस्ती पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मित्रता प्रेम, सम्मान, समर्पण और स्वार्थ रहित होने का एक आदर्श उदाहरण है।
दोस्ती की कसौटी: सुदामा की संकोच और गरीबी
आचार्य अभिषेक शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे, लेकिन वे जानते थे कि उनका मित्र श्रीकृष्ण मथुरा के राजा हैं। उनकी पत्नी वसुंधरा के बार-बार कहने पर भी वे श्रीकृष्ण के पास मदद मांगने नहीं गए। उनके मन में यह डर था कि उनकी गरीबी देखकर लोग उनके मित्र श्रीकृष्ण का उपहास करेंगे और वे खुद भी अपने मित्र को शर्मिंदा नहीं करना चाहते थे।
जब सुदामा की गरीबी चरम पर पहुँच गई और उनके बच्चे भूखे रहने लगे, तब पत्नी के आग्रह पर वे मथुरा जाने को तैयार हुए। मथुरा पहुँचने पर द्वारपालों ने जब श्रीकृष्ण को बताया कि "एक गरीब ब्राह्मण अपने आपको आपका मित्र बता रहा है और उसका नाम सुदामा है," तो श्रीकृष्ण तुरंत नंगे पैर उसकी ओर दौड़ पड़े।
बिना मांगे सब कुछ दिया
आचार्य शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को देखते ही गले लगा लिया और अपने महल में ले गए। वे जानते थे कि सुदामा अपनी गरीबी के बारे में कुछ नहीं कहेंगे, इसलिए श्रीकृष्ण ने बिना कुछ कहे ही अपने मित्र को सब कुछ दे दिया। यह सच्ची मित्रता का एक आदर्श उदाहरण है, जो सिखाती है कि सच्ची दोस्ती धन या सामाजिक स्थिति पर आधारित नहीं होती।
आज की मित्रता पर कटाक्ष
आचार्य अभिषेक शास्त्री ने आज के समाज में मित्रता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज लोग केवल अपने स्वार्थ के लिए मित्रता करते हैं और जब उनका काम निकल जाता है, तो वे मित्र को दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकाल कर फेंक देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग यह नहीं जानते कि ईश्वर सब कुछ देख रहा है और उन्हें इसका जवाब देना होगा। कथा के आयोजक लालजी तिवारी और लल्लन तिवारी सहित कई ग्रामीण इस दौरान मौजूद थे।