फोरलेन हाईवे निर्माण में भेदभाव का आरोप, पीड़ितों ने डीएम से लगाई गुहार
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ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले की स्वतंत्र जांच कराने और दोनों पक्षों को बराबर मुआवजा देने की मांग की ताकि किसी का आशियाना अन्यायपूर्ण तरीके से न उजड़े।
 

खड़ेहरा गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

सभी ने की एक समान मुआवजे की मांग

नक्शे में बदलाव से और बिगड़ता जा रहा है मामला

चंदौली जिले में जिला मुख्यालय से सैदपुर तक प्रस्तावित फोरलेन हाईवे निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को सकलडीहा तहसील के खड़ेहरा गांव से दर्जनों प्रभावित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने प्रशासन पर मुआवजे में भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है।

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे निर्माण में सड़क के दोनों तरफ घर बसे हैं, लेकिन प्रशासन ने केवल एक तरफ के लोगों को ही मुआवजा देने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर के निवासियों को अनदेखा किया जा रहा है, जबकि दोनों ही पक्ष सरकारी डीह की जमीन पर वर्षों से रह रहे हैं और वहीं पर पक्के मकान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं।

नक्शे में बदलाव से और बिगड़ा मामला
ग्रामीणों ने बताया कि पहले जारी नक्शे में सड़क की चौड़ाई अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन हाल ही में बिना किसी पूर्व सूचना के नक्शे में संशोधन किया गया, जिससे अब दूसरी तरफ के भी मकान अतिक्रमण की जद में आ गए हैं। इससे ग्रामीणों में भारी असंतोष व्याप्त है।

मुआवजे में समानता की मांग
पीड़ितों ने डीएम से समान मुआवजे और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर मकान अधिग्रहण किया जा रहा है, तो उन्हें भवन निर्माण की पूरी क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए, चाहे वे सड़क के किसी भी तरफ क्यों न हों।

आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेताया कि यदि जल्द ही न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। प्रभावितों ने कहा कि वे सड़क निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रशासन का यह एकतरफा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता।

डीएम से की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले की स्वतंत्र जांच कराने और दोनों पक्षों को बराबर मुआवजा देने की मांग की ताकि किसी का आशियाना अन्यायपूर्ण तरीके से न उजड़े।