बानगंगा ड्रेन पुल को लेकर गुरेरा-रामगढ़ मार्ग पर चक्का जाम, किसान बोले- ऊंचा और चौड़ा बनाया जाए पुल, ठेकेदार हुए वापस 

 

चंदौली के गुरेरा-रामगढ़ मार्ग पर बानगंगा ड्रेन पुल की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। 2 घंटे तक जाम लगाकर निर्माण कार्य रुकवाया, जिसके बाद ठेकेदार को जेसीबी वापस लौटानी पड़ी।

 
 

बानगंगा ड्रेन पुल पर किसानों का प्रदर्शन

गुरेरा-रामगढ़ मार्ग 2 घंटे रहा पूरी तरह जाम

बानगंगा ड्रेन पुल चौड़ा और ऊंचा करने की मांग

विरोध के चलते ठेकेदार को जेसीबी लौटानी पड़ी

उत्तर प्रदेश सरकार की महात्वाकांक्षी योजना के तहत अघोराचार्य बाबा कीनाराम की पवित्र जन्मस्थली रामगढ़ और बाबा कीनाराम मठ को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने का काम चल रहा है। इसके लिए गुरेरा से नादी निधौरा तक सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम तेजी से किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत रास्ते में पड़ने वाली पुलियों और बानगंगा ड्रेन पर बने पुल का भी चौड़ीकरण प्रस्तावित है। हालांकि, पुल की चौड़ाई और ऊंचाई बढ़ाए बिना काम शुरू किए जाने से स्थानीय किसानों का गुस्सा बुरी तरह भड़क गया है।

2 घंटे ठप रहा गुरेरा-रामगढ़ मार्ग, हुई नारेबाजी
गुरुवार को नाराज किसानों और ग्रामीणों ने गुरेरा-रामगढ़ मार्ग पर पहुंचकर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया। किसानों ने सड़क पर बैठकर करीब दो घंटे तक यातायात ठप कर दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अचानक हुए इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह से बाधित रहा।

पुराना और संकरा पुल बनता है बाढ़ का कारण
ग्रामीणों का कहना है कि बानगंगा ड्रेन पर बना मौजूदा पुल कई सालों पुराना, संकरा और काफी नीचा है। हर साल बरसात के मौसम में यहां जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इससे रामगढ़, रइया, बैराठ, बरिया, महमदपुर, कूरा समेत दर्जनों आसपास के गांवों के किसानों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर सड़क तो चौड़ी कर दी गई, लेकिन पुल को पुराने आकार में ही छोड़ दिया गया, तो आने वाले दिनों में बाढ़ और जलनिकासी की समस्या और ज्यादा विकराल रूप ले लेगी।

ज्ञापन के बावजूद सुनवाई न होने से नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर कई बार एसडीएम, जिलाधिकारी और पीडब्ल्यूडी के बड़े अधिकारियों को लिखित ज्ञापन सौंप चुके हैं। हर बार पुल को पर्याप्त चौड़ा और ऊंचा बनाने की मांग की गई, लेकिन अब तक अधिकारियों ने कोई ठोस पहल नहीं की। इससे पहले भी जब-जब ठेकेदार ने काम शुरू करने की कोशिश की, ग्रामीणों ने बिना डिज़ाइन बदले निर्माण का विरोध कर काम रुकवा दिया।

जेसीबी के सामने धरने पर बैठे किसान, लौटना पड़ा वापस
गुरुवार को जब ठेकेदार ने जेसीबी मशीन भेजकर फिर से निर्माण कार्य शुरू कराने की कोशिश की, तो खबर मिलते ही रामगढ़ समेत आसपास के दर्जनों गांवों के किसान मौके पर जुट गए। सुभाष सिंह 'फौजी' और गोपाल पांडेय की अगुवाई में किसान जेसीबी के सामने धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। किसानों के उग्र विरोध को देखकर ठेकेदार को अपनी जेसीबी मशीन वापस बुलानी पड़ी और काम पूरी तरह से रोकना पड़ा।

"मांग पूरी न होने तक नहीं होने देंगे निर्माण"
किसान नेता सुभाष सिंह 'फौजी' ने कहा कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। बानगंगा ड्रेन का यह पुल पूरे इलाके के लिए जीवन रेखा की तरह है। अगर इसे वैज्ञानिक तरीके से ऊंचा और चौड़ा नहीं बनाया गया तो हर साल हजारों बीघा फसल और आसपास की बस्तियां पानी में डूब जाएंगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जब तक पुल का डिज़ाइन बदलकर उसकी ऊंचाई और चौड़ाई नहीं बढ़ाई जाती, तब तक यहां निर्माण कार्य किसी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मौजूद रहे ग्रामीण
इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से सुभाष सिंह, गोपाल पांडेय, अशोक पांडेय, पवन सिंह, सामवर पाठक, जयप्रकाश पांडेय, दुखभंजन पाठक, मनोज सिंह, बालेश्वर सिंह, विक्रमा मौर्य, मिंकू पांडेय, राजकुमार सिंह, प्रभुनाथ पांडेय, अर्पित पांडेय, रिंकू यादव, आकाश सिंह, अंश सिंह, अरुण यादव, विनय सिंह, राजू सिंह, मुलायम यादव, ऋषिकेश यादव, धनंजय मौर्य, सुनील मौर्य और दूधनाथ मौर्य समेत सैकड़ों किसान व ग्रामीण उपस्थित रहे।