चंदौली में अजब-गजब नजारा: लेखपाल की मनमानी से परेशान दूसरे जिले के नायब तहसीलदार अपनी ही जमीन के लिए बैठे आमरण अनशन पर
चंदौली की सकलडीहा तहसील में हमीरपुर के नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर अपनी जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण और लेखपाल द्वारा एक साल से रिपोर्ट न लगाने के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
नायब तहसीलदार बैठे आमरण अनशन पर
लेखपाल पर रिपोर्ट दबाने का आरोप
शेवखर कला गांव का जमीन विवाद
समाधान दिवस में मचा हड़कंप
सकलडीहा तहसील परिसर की घटना
चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील परिसर में शनिवार को एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ आम जनता की समस्याओं को सुलझाने वाले एक प्रशासनिक अधिकारी को खुद सिस्टम की ढुलमुल कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा। वर्तमान में हमीरपुर जिले में तैनात नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर अपनी निजी जमीन के विवाद और एक स्थानीय लेखपाल की मनमानी को लेकर तहसील परिसर में ही आमरण अनशन पर बैठ गए। इस हाई-प्रोफाइल धरने को देखकर पूरी तहसील में हड़कंप मच गया।
एक साल से रिपोर्ट दबाने का आरोप
नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर का आरोप है कि उन्होंने सकलडीहा तहसील क्षेत्र के सेवखर कला गांव में बकायदा कानूनी रूप से रजिस्ट्री कराकर एक जमीन खरीदी थी। इस जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ कई बार तहसील प्रशासन से लिखित शिकायत की, लेकिन संबंधित हलका लेखपाल पिछले एक साल से पत्रावली (फाइल) अपने पास दबाकर बैठा है। लेखपाल लगातार टालमटोल कर रहा है और मौके की रिपोर्ट आगे नहीं बढ़ा रहा है, जिससे अवैध निर्माण नहीं रुक पा रहा है।
समाधान दिवस में बड़े अफसरों के सामने बैठे रहे
शनिवार को सकलडीहा तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया था, जहाँ जनता की फरियाद सुनने खुद जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) भी पहुंचे थे। इन बड़े अधिकारियों की मौजूदगी के बीच भी नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर अपनी मांग पर अड़े रहे और अनशन स्थल से नहीं उठे। उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि प्रशासनिक उदासीनता और निचले स्तर पर जारी लापरवाही के कारण ही आज उन्हें एक अधिकारी होते हुए भी आमरण अनशन जैसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
पूर्व में संग्रह अमीन रह चुके हैं हिम्मत बहादुर
पीड़ित हिम्मत बहादुर ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में उपजिलाधिकारी (SDM) से भी गुहार लगाई थी। एसडीएम ने भरोसा दिया था कि लेखपाल की आख्या आते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन लेखपाल जानबूझकर मामले को लटका रहा है। गौरतलब है कि हिम्मत बहादुर वर्तमान पद पर जाने से पहले इसी सकलडीहा तहसील में संग्रह अमीन के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। फिलहाल, एक प्रशासनिक अधिकारी के इस तरह अनशन पर बैठने से जहां आम जनता में तरह-तरह की चर्चाएं हैं, वहीं तहसील प्रशासन पूरे मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की बात कह रहा है।