BSA साहब कभी कंपोजिट विद्यालय रामगढ़ का दौरा कर लीजिए..बहुत बुरा हाल है: मूलभूत सुविधाओं का है टोटा
चहनिया विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय रामगढ़ में 300 से अधिक बच्चे गंदगी, गंदे पानी और बदहाल शौचालय के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षक और ग्राम प्रधान की अनदेखी से सरकारी दावों की पोल खुल रही है।
चहनिया के रामगढ़ स्कूल की बदहाली
300 से अधिक बच्चों का भविष्य अधर में
शौचालय खराब और पीने का पानी गंदा
ग्राम प्रधान और सफाईकर्मी की लापरवाही
सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे शिक्षक व बच्चे
चंदौली जिले के चहनिया विकासखंड में स्थित कंपोजिट विद्यालय रामगढ़ की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। वर्ष 1956 में स्थापित इस ऐतिहासिक विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा दी जाती है और परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है। कागजों में यहां पक्की बाउंड्री, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी तमाम सुविधाएं दर्ज हैं, लेकिन हकीकत में स्थिति बेहद चिंताजनक है।
300 के आसपास बच्चे पर गंदा पानी पीने की मजबूरी
विद्यालय के बारे में ऑनलाइन दर्ज जानकारी में इस विद्यालय में 14 कक्षाएं हैं और 300 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। स्कूल में लगभग एक दर्जन शिक्षक तैनात हैं। हाल ही में जब स्कूल का जायजा लिया गया तो पाया गया कि पीने के पानी का TDS लगभग 500 PPM है, जो सेहत के लिहाज से सही नहीं माना जा सकता। इसके अलावा परिसर में उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियां, चारों तरफ बिखरा कूड़ा और बारिश के दिनों में जलभराव बच्चों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं और लड़कियों को शौचालय के लिए होती है।
शौचालय की बदहाली से महिलाएं और बच्चे परेशान
गांव के निवासी आशीष सिंह ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई, किताबें और मिड-डे मील की व्यवस्था तो ठीक है, लेकिन सुविधाओं का घोर अभाव है। विद्यालय में कई महिला शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती और सैकड़ों छात्राएं आती हैं, लेकिन चालू शौचालय न होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण लगातार अपील कर रहे हैं कि उनके बच्चों के भविष्य को देखते हुए प्रशासन जल्द कदम उठाए।
अधिकारी और ग्राम प्रधान एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने सुविधाओं और मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को आवेदन दे दिया है। जब तक बजट और निर्देश नहीं आते, वे असहाय हैं। वहीं गांव की ग्राम प्रधान रामप्यारी देवी और उनके पति रमाकांत यादव की ओर से भी सफाईकर्मी नियमित नहीं भेजा जाता। नतीजा यह है कि शौचालय और परिसर की कभी सफाई नहीं होती और समस्या जस की तस बनी हुई है।
अब देखना है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मामले को किस तरह संज्ञान में लेते हैं और इस बारे में क्या कार्यवाई करते हैं।