ओलंपियन शिवपाल सिंह मामले में चंदौली में बढ़ा रोष; मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग

चंदौली के ओलंपियन भाला फेंक खिलाड़ी शिवपाल सिंह प्रकरण में युवा संघर्ष मोर्चा ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। मोर्चा ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर बलुआ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
 

ओलंपियन शिवपाल सिंह मामला गरमाया

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

निष्पक्ष स्वतंत्र जांच की मांग

बलुआ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

लक्ष्मण पुरस्कार विजेता का अपमान

चंदौली जनपद के होनहार लाल और देश के जाने-माने ओलंपियन भाला फेंक (जैवलीन थ्रो) खिलाड़ी शिवपाल सिंह के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की मांग को लेकर 'युवा संघर्ष मोर्चा' मैदान में उतर आया है। मोर्चा के संयोजक शैलेंद्र पांडेय (एडवोकेट) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच कराने और खिलाड़ी को न्याय दिलाने का पुरजोर अनुरोध किया गया है।

पुलिसिया कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल, मानवाधिकारों के हनन का आरोप
मोर्चा के संयोजक शैलेंद्र पांडेय ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि शिवपाल सिंह चंदौली जनपद के असली गौरव हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारत का झंडा बुलंद कर जिले और पूरे देश का मान बढ़ाया है। संगठन का आरोप है कि बलुआ थाना पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में बिना किसी गहन और निष्पक्ष तफ्तीश के, महज जल्दबाजी में एकतरफा कार्रवाई की है। उन्होंने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को चहनिया चौराहे पर सार्वजनिक रूप से परेड कराना और फिर न्यायिक हिरासत में भेज देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पूरी तरह से मानवीय गरिमा और मानवाधिकारों के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।

खेल जगत और नई पीढ़ी पर पड़ेगा विपरीत असर, उपलब्धियों का किया जिक्र
युवा संघर्ष मोर्चा का मानना है कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले और युवाओं के रोल मॉडल रहे खिलाड़ियों के साथ यदि इस तरह का अनुचित व्यवहार किया जाएगा, तो इससे खेल जगत और नई पीढ़ी में बेहद नकारात्मक संदेश जाएगा। इससे खेलों के प्रति युवाओं का मनोबल बुरी तरह टूटेगा। ज्ञापन में शिवपाल सिंह की खेल उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया गया कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में उनके संघर्षों और खेल की सराहना की थी। इसके अलावा खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें सर्वोच्च 'लक्ष्मण पुरस्कार' से भी नवाज चुकी है।

पदक तालिका में देश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ी के लिए न्याय की गुहार
उल्लेखनीय है कि शिवपाल सिंह ने वर्ष 2019 में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (दोहा) में भारत के लिए रजत पदक जीता था, जबकि वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स (चीन) में उन्होंने देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला था। इसके साथ ही वह 2018 के एशियन गेम्स और प्रतिष्ठित टोक्यो ओलंपिक-2020 में भी भारतीय दल का हिस्सा रह चुके हैं। संगठन ने साफ तौर पर कहा कि पिछले कुछ समय से बलुआ पुलिस की कार्यशैली लगातार विवादों और सवालों के घेरे में रही है। ऐसे प्रतिष्ठित खिलाड़ी की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली इस पुलिसिया कार्रवाई से आम जनता में भारी नाराजगी है, इसलिए दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।