सकलडीहा इंस्पेक्टर की तत्परता से बची घायल युवक की जान, खुद सरकारी गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल
कोतवाल ने पेश की मानवता की मिसाल
सकलडीहा थानाध्यक्ष दिलीप श्रीवास्तव ने घायल दुर्गेश सिंह को पहुंचाया CHC
समय पर इलाज होने से बच गयी जान
चंदौली जिले के सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र में हुई एक गंभीर सड़क दुर्घटना में, पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता ने एक युवक की जान बचाकर मानवता की मिसाल पेश की है। डेढ़ावल चौकी के पास तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने की टक्कर में भोजापुर निवासी दुर्गेश सिंह (पुत्र प्रदीप सिंह) गंभीर रूप से घायल हो गए और सड़क पर गिरते ही बेहोश हो गए। मौके पर राहगीरों की भीड़ जमा थी, लेकिन युवक की नाजुक स्थिति को देखकर कोई भी उसे अस्पताल पहुंचाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
थानाध्यक्ष ने लिया त्वरित और साहसी निर्णय
गश्त पर मौजूद थानाध्यक्ष सकलडीहा, दिलीप श्रीवास्तव, की नजर जब इस दुर्घटना पर पड़ी, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए स्थिति का आकलन किया। आमतौर पर सड़क हादसों में घायलों को अस्पताल पहुँचाने में होने वाली देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, लेकिन थानाध्यक्ष ने सरकारी गाड़ी की परवाह न करते हुए, खुद ही घायल युवक को उठाकर गाड़ी में लादा। उनकी यह तेजी और संवेदनशीलता ही इस युवक की जान बचाने में निर्णायक साबित हुई।
समय पर इलाज बना जीवन रक्षक
गंभीर रूप से चोटिल दुर्गेश को सिर में गहरी चोट लगी थी, जिससे उनकी हालत अत्यंत चिंताजनक थी। थानाध्यक्ष दिलीप श्रीवास्तव ने बिना विलंब किए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सकलडीहा पहुँचाया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उपचार शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि 'गोल्डन आवर' (दुर्घटना के बाद का महत्वपूर्ण समय) में इलाज शुरू होने के कारण ही युवक की जान बच पाना संभव हुआ है। उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उपचार जारी है।
परिजनों ने व्यक्त किया आभार
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और परिजन भी तुरंत अस्पताल पहुंचे। युवक के परिजनों ने थानाध्यक्ष दिलीप श्रीवास्तव का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अगर थानाध्यक्ष ने इतनी तेजी और इंसानियत न दिखाई होती, तो उनके बेटे के साथ कुछ भी हो सकता था। थानाध्यक्ष के इस मानवीय प्रयास में पीछे आ रहे ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने भी सहयोग किया, जिससे अस्पताल पहुंचने की प्रक्रिया और भी सुचारू हो गई।
पुलिस के प्रति बढ़ा लोगों का विश्वास
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पुलिस बल सिर्फ कानून व्यवस्था और दंड संहिता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी उनके कर्तव्य का एक अभिन्न अंग है। राहगीरों ने भी थानाध्यक्ष के इस मानवीय कदम की सराहना की। ऐसे उदाहरण समाज में पुलिस पर लोगों का विश्वास बढ़ाते हैं। स्थानीय पुलिस अब दुर्घटना के कारणों की जाँच कर रही है और दोनों वाहनों की पहचान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।