चंदौली के संपूर्ण समाधान दिवस की हकीकत: आला अफसरों के उठते ही उजड़ी 'महफिल', सरकार की मंशा पर उठे सवाल

चंदौली की सकलडीहा तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम और एसपी के जाते ही अन्य अधिकारियों के भागने से हंगामा मच गया। आला अफसरों के इस रवैये से दूर-दराज से आए फरियादी मायूस होकर लौटने को मजबूर हुए।

 

डीएम और एसपी के निकलते ही उजड़ा समाधान दिवस

सकलडीहा तहसील में अधिकारियों ने दिखाई भारी लापरवाही

घंटों इंतजार करने वाले फरियादियों को लौटना पड़ा मायूस

योगी सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे लापरवाह अधिकारी

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की मंशा है कि जनसमस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन गंभीरता से किया जाए। लेकिन चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। यहां आला अधिकारियों की मौजूदगी न होने पर यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम महज एक खानापूर्ति बनकर रह गया। डीएम और एसपी के जाते ही तहसील परिसर से अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों का अचानक गायब हो जाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

डीएम-एसपी के जाते ही खाली हुईं कुर्सियां
सकलडीहा तहसील परिसर में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस उस समय सवालों के घेरे में आ गया, जब जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को किसी अन्य विभागीय निरीक्षण कार्यक्रम में जाना पड़ा। इसके चलते दोनों वरिष्ठ अधिकारी निर्धारित समय से करीब 15 मिनट पहले ही समाधान दिवस से प्रस्थान कर गए। लेकिन हैरानी तब हुई जब उनके जाते ही अन्य तमाम जिलास्तरीय अधिकारी भी एक-एक कर कार्यक्रम स्थल से खिसक गए। देखते ही देखते अधिकारियों की कुर्सियां खाली हो गईं और समाधान दिवस की 'महफिल' पूरी तरह उजड़ गई।

दूर-दराज से आए फरियादियों में पसरी मायूसी
अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये का सबसे बुरा असर उन फरियादियों पर पड़ा, जो अपनी गंभीर शिकायतों को लेकर कई किलोमीटर दूर से सकलडीहा तहसील पहुंचे थे। कई फरियादी घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे ताकि वे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रख सकें। लेकिन अधिकारियों के अचानक वहां से चले जाने से फरियादियों को भारी निराशा हाथ लगी। जनता के बीच अब अधिकारियों के इस रवैये को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

उप जिलाधिकारी और तहसीलदारों ने संभाली कमान
हालांकि, इस पूरी अव्यवस्था के बीच उप जिलाधिकारी (एसडीएम) सकलडीहा कुंदन राज कपूर, तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने मोर्चा संभाले रखा। वे लगातार फरियादियों की शिकायतों को सुनते रहे और संबंधित विभागों को त्वरित निस्तारण के निर्देश देते रहे। लेकिन जिलास्तरीय प्रमुख अधिकारियों की गैर-मौजूदगी के कारण कई जटिल मामलों पर प्रभावी कार्रवाई मौके पर नहीं हो सकी।

सरकारी मंशा पर फिर उठे सवाल
सकलडीहा में अधिकारियों के इस आचरण के बाद चंदौली जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार जनता की समस्याओं को लेकर इतनी गंभीर है, तो ऐसे में अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया शासन की नीतियों को पलीता लगाने जैसा है। जनता ने सवाल उठाया है कि यदि जनसमस्याओं के समाधान के लिए तय किए गए विशेष दिवसों में भी अधिकारी गंभीरता नहीं दिखाएंगे, तो आम जनता अपनी शिकायतों के निवारण के लिए किसके पास जाएगी।