चंदौली की बेटी रेखा का कमाल: पैदल चलकर स्कूल जाती थी, बिना ट्यूशन इंटरमीडिएट परीक्षा में किया टॉप

चंदौली की रेखा कुमारी ने 5 किलोमीटर पैदल चलकर और बिना ट्यूशन के इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉप किया है। चंदौली के टॉप-10 में केवल बेटियों का दबदबा रहा, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

 
 

रेखा कुमारी इंटरमीडिएट टॉपर चंदौली

बिना ट्यूशन बोर्ड परीक्षा में सफलता

चंदौली टॉप-10 में बेटियों का दबदबा

यूपी बोर्ड रिजल्ट 2025 चंदौली विशेष

कठिन मेहनत से सफलता की कहानी

चंदौली जिले के कमालपुर की रहने वाली रेखा कुमारी ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से वह मुकाम हासिल किया है जो किसी के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। हरिद्दार राय इंटर कॉलेज की छात्रा रेखा ने इंटरमीडिएट परीक्षा में न केवल अपने विद्यालय का, बल्कि पूरे चंदौली जिले का नाम रोशन किया है। यह सफलता इसलिए और भी खास है क्योंकि रेखा ने बिना किसी महंगे कोचिंग या ट्यूशन के इसे हासिल किया है। 500 में से 466 अंक प्राप्त करके उन्होंने न केवल जिले में पहला स्थान हासिल किया, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में भी 14वां स्थान प्राप्त कर राज्य का मान बढ़ाया।

उनकी जीवन यात्रा संघर्षों से भरी है। उनके पिता राजेश कुमार एक मेडिकल शॉप चलाते हैं। तमाम आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। दैनिक रूप से करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने वाली रेखा का सपना भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है, साथ ही वह प्रशासनिक सेवा में जाकर भी देश के लिए कुछ करना चाहती हैं। प्रधानाचार्य डॉ. राम प्रताप राय ने रेखा की उपलब्धि को अन्य छात्रों के लिए एक मशाल के रूप में देखा है।

इतिहास रचते चंदौली के आंकड़े
इस बार का यूपी बोर्ड परिणाम चंदौली के लिए ऐतिहासिक रहा है। राज्य के 75 जिलों में चंदौली एकमात्र ऐसा जिला बनकर उभरा है, जहां इंटरमीडिएट के टॉप-10 की सूची में सिर्फ और सिर्फ बेटियों ने कब्जा जमाया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सूची में कुल 13 छात्राएं शामिल हैं, जबकि एक भी छात्र टॉप-10 में जगह नहीं बना सका। रेखा कुमारी के अलावा, दिव्या कुमारी, अमृता मौर्य, खुशबू कुमारी, निशा इफ्तिखार और प्रिया मौर्य जैसी होनहार छात्राओं ने बेहतरीन अंक हासिल किए हैं।

जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष हाईस्कूल में 84.90 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 65.70 प्रतिशत छात्र-छात्राएं सफल रहे हैं। हालांकि कुछ छात्र असफल भी हुए हैं, लेकिन लड़कियों के प्रदर्शन ने जिले को पूरे प्रदेश में एक नई पहचान दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिणाम केवल अंकों का खेल नहीं है, बल्कि यह लड़कियों के प्रति बदलती सोच, पारिवारिक सहयोग और जिले में बेहतर होते शैक्षिक माहौल का परिणाम है। रेखा जैसी छात्राओं की सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों, तो सीमित संसाधन भी सफलता के आड़े नहीं आते। आने वाले समय में यह चंदौली के अन्य छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बना रहेगा।