मेहनत और लगन से NIT पटना में असिस्टेंट प्रोफेसर बने डॉ. मनीष, डबरिया गांव में खुशी का माहौल 

 

चंदौली के डबरिया गांव निवासी डॉ. मनीष कुमार सिंह का चयन प्रतिष्ठित एनआईटी पटना में अस्सिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है। तानों और आलोचनाओं का जवाब मेहनत से देकर उन्होंने पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

 
 

एनआईटी पटना में असिस्टेंट प्रोफेसर बने

तानों का मेहनत से दिया करारा जवाब

जनता जनार्दन इंटर कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई

चंदौली के डबरिया गांव में जश्न

परिजनों और मार्गदर्शकों का माना आभार

"मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।" इस कहावत को चंदौली जिले के ग्राम डबरिया निवासी डॉ. मनीष कुमार सिंह ने सच कर दिखाया है। एक सुदूर और पिछड़े इलाके से निकलकर अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए डॉ. सिंह का चयन देश के प्रतिष्ठित और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना' (NIT Patna) के Applied Physics and Material Engineering Department में बतौर सहायक आचार्य (Assistant Professor) हुआ है।  

तानों से मिली प्रेरणा, आलोचकों को दिया करारा जवाब
डॉ. मनीष की यह सफलता संघर्षों और तानों के बीच से निकली है। 10वीं कक्षा में जब वे जनता जनार्दन इंटर कॉलेज (JJIC) डबरिया में पढ़ते थे, तो उनके साथी छात्र अक्सर उनका उपहास उड़ाया करते थे। वे ताना मारते थे कि दादा के कॉलेज में होने के कारण ही वे आगे बढ़ेंगे। आज डॉ. सिंह ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है।

एनआईटी और आईआईटी से हासिल की उच्च शिक्षा
ए.एस.वी.एम. (ASVM) शहीदगाँव से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. सिंह ने एनआईटी और आईआईटी जैसे देश के शीर्ष संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। साथ ही बीएचयू से पीएचडी करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का संकल्प लिया।  एनआईटी पटना से पहले उनका चयन विख्यात वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान (VIT, आंध्र प्रदेश परिसर) में भी हो चुका था। अब वे देश के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान एनआईटी-पटना में अपनी सेवाएं देंगे।

परिजनों और मार्गदर्शकों को दिया सफलता का श्रेय
डॉ. मनीष के पिता श्री रमेश चंद्र सिंह ITBP में सब-इंस्पेक्टर हैं। अपनी इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने परिवार, पूजनीय दादी मां, गुरुजनों और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने विशेष रूप से स्व. श्री सुभाष खरवार (मास्टर साहब), स्व. डॉ. नागेंद्र मिश्र और श्री आशीष विद्यार्थी के मार्गदर्शन व सहयोग का आदरपूर्वक आभार व्यक्त किया। 

आलोचकों को माना अपनी सफलता की वजह
अपनी उपलब्धि पर डॉ. मनीष ने कहा कि आलोचकों की टिप्पणियों ने ही उनके अंदर सफलता पाने की असली आग पैदा की। उन्होंने कहा कि एनआईटी में सेवा का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य आईआईटी में सेवा देना है। उनकी इस उपलब्धि से डबरिया गांव और पूरे चंदौली जिले में बेहद खुशी का माहौल है।