पतियों पर बढ़ते अत्याचार और झूठे मुकदमों से हड़कंप: चंदौली में उठी राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की मांग
चंदौली के सकलडीहा में पतियों और पुरुषों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठी है। युवा संघर्ष मोर्चा ने एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष न्याय और झूठे मुकदमों से बचाव के लिए राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग की।
चंदौली में राष्ट्रीय पुरुष आयोग की मांग
पतियों पर अत्याचार रोकने के लिए ज्ञापन
झूठे मुकदमों और मानसिक दबाव पर चिंता
सकलडीहा एसडीएम आकांक्षा सिंह को ज्ञापन
युवा संघर्ष मोर्चा ने उठाई पुरुषों की आवाज
चंदौली जनपद के सकलडीहा में पतियों और पुरुषों पर बढ़ रहे अत्याचार और मानसिक उत्पीड़न के मामलों को लेकर माहौल गर्म है। युवा संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने उप जिलाधिकारी (एसडीएम) आकांक्षा सिंह से मुलाकात की। संगठन के संयोजक और वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे 'कवि' के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से देश में जल्द से जल्द राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की पुरजोर मांग उठाई गई।
झूठे मुकदमों और पारिवारिक उत्पीड़न पर चिंता
ज्ञापन सौंपते हुए शैलेंद्र पांडे 'कवि' ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में ऐसे अनगिनत मामले सामने आ रहे हैं, जहाँ पारिवारिक विवाद में पुरुषों को भारी मानसिक, सामाजिक और कानूनी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मामलों में कानून का गलत इस्तेमाल करके पुरुषों को झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है। इससे न सिर्फ उनका सामाजिक सम्मान खत्म होता है, बल्कि उन्हें गहरा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
अवसाद और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी
अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि लगातार बढ़ते कानूनी और मानसिक दबाव के कारण कई पुरुष अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। परिस्थितियाँ इतनी बिगड़ जाती हैं कि कुछ मामलों में पुरुष आत्महत्या जैसा कदम उठाने को भी मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष पूरे परिवार और समाज की जिम्मेदारी निभाता है, लेकिन जब उस पर मुसीबत आती है, तो उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता।
न्याय के लिए समर्पित मंच की सख्त जरूरत
युवा संघर्ष मोर्चा का कहना है कि वर्तमान में पुरुषों की समस्याओं को सुनने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए देश में कोई समर्पित मंच या अलग संस्था मौजूद नहीं है। लगातार हो रही सामाजिक उपेक्षा और मानसिक दबाव के कारण पुरुषों का मनोबल टूट रहा है। इसका सीधा और बुरा असर हमारी पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर पड़ रहा है, जिसे समय रहते सुधारना बहुत जरूरी है।
राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की केंद्र से अपील
संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्तमान स्थितियों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष आयोग का गठन किया जाए। इससे पुरुषों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जाँच हो सकेगी और उन्हें भी संविधान के तहत बराबरी का न्याय और सुरक्षा मिलेगी। इस मौके पर मदन सिंह पांडे, ईश्वर चंद्र पांडे, अरुण पाठक और सुमित सोनकर समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने इस मांग का खुलकर समर्थन किया।