अमादपुर में 10 दिवसीय लोकगीत कार्यशाला का शानदार समापन: छात्र-छात्राओं ने बिखेरी लोककला की छटा, मिले प्रमाण-पत्र

 

धानापुर के हरदेव इंटर कॉलेज में 10 दिनों से चल रही लोकगीत कार्यशाला का गुरुवार को समापन हो गया। 'सृजन' कार्यक्रम के तहत आयोजित इस वर्कशॉप में छात्र-छात्राओं को लोकगीतों की बारीकियां सिखाई गईं और प्रमाण-पत्र बांटे गए।

 
 

हरदेव इंटर कॉलेज अमादपुर में लोकगीत कार्यशाला

यूपी संस्कृति विभाग का 10 दिवसीय 'सृजन' कार्यक्रम

प्रसिद्ध लोकगायक मंगल यादव ने दिया संगीत प्रशिक्षण

छात्र-छात्राओं को बांटे गए प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र

लोककला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर

चंदौली जिले के धानापुर क्षेत्र स्थित हरदेव इंटर कॉलेज, अमादपुर में आयोजित 10 दिवसीय लोकगीत कार्यशाला का गुरुवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग) और हरदेव इंटर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में 'सृजन' कार्यक्रम के तहत किया गया था। समापन समारोह में प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र दिए गए।

10 दिनों तक सीखीं लोकगीत और गायन की बारीकियां
14 जुलाई से 23 जुलाई तक चली इस कार्यशाला में विद्यालय के बच्चों और स्थानीय लोककला प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं, अलग-अलग लोकगीत विधाओं, गायन शैली, स्वर-साधना, मंच संचालन और स्टेज पर अपनी बात व प्रस्तुति को असरदार तरीके से रखने का व्यावहारिक पाठ पढ़ाया गया।

लोकगायक मंगल यादव ने दी बेहतरीन ट्रेनिंग
प्रसिद्ध लोकगायक मंगल यादव ने बतौर प्रशिक्षक बच्चों को लोकसंगीत के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण और इसे बचाए रखने का संदेश दिया। वर्कशॉप के आखिरी दिन छात्र-छात्राओं ने मनमोहक लोकगीत गाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ढोलक पर जितेंद्र नाथ मिश्र और हारमोनियम पर अमेरिका राय ने अपने संगीत से समां बांध दिया।

सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मददगार हैं ऐसी कार्यशालाएं
समापन के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है। इससे प्रदेश की लोक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिलती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाचार्य सियाराम यादव सहित योगेंद्र प्रसाद यादव, मंसूर आलम, अमरनाथ यादव, विनोद कुमार यादव और समस्त शिक्षकों व कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।