मकर संक्रांति पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी: धानापुर के गंगा घाटों पर उमड़ा जनसैलाब, 'हर-हर गंगे' से गूंजा पूरा क्षेत्र
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर चंदौली के धानापुर स्थित विभिन्न गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और दान-पुण्य किया। प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।
धानापुर के विभिन्न गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़
'हर-हर गंगे' के जयघोष से भक्तिमय हुआ वातावरण
ग्राम प्रधान रामजी कुशवाहा ने चलाया सफाई अभियान
सुरक्षा के लिए पुलिस बल की रही कड़ी तैनाती
आचार्य रमेश द्विवेदी ने बताया पर्व का धार्मिक महत्व
चंदौली जनपद के धानापुर क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर नरौली, अमादपुर, गुरैनी, सोनहुली और रायपुर डम्हारी सहित क्षेत्र के अन्य प्रमुख गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और सैकड़ों लोगों ने पतित पावनी मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।
भक्ति और दान-पुण्य का संगम
घाटों पर 'हर-हर गंगे' और 'जय सूर्य देव' के जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। मकर संक्रांति को सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के उपरांत भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और अपनी क्षमतानुसार तिल, गुड़, खिचड़ी व वस्त्रों का दान कर सुख-समृद्धि की कामना की। यद्यपि 14 और 15 जनवरी की तिथि को लेकर कुछ श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति दिखी, फिर भी घाटों पर पर्व की रौनक देखते ही बन रही थी।
सफाई अभियान और प्रशासनिक सतर्कता
श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए धानापुर ग्राम प्रधान रामजी कुशवाहा ने नरौली गंगा घाट पर विशेष सफाई अभियान चलाया। घाटों की सफाई कराकर वहां चूने का छिड़काव कराया गया ताकि श्रद्धालु स्वच्छ वातावरण में पूजा-पाठ कर सकें। दूसरी ओर, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। धानापुर थाना प्रभारी त्रिवेणी लाल सेन के नेतृत्व में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी लगातार घाटों का निरीक्षण करते रहे। घाटों पर महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई थी ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा में कोई चूक न हो।
धार्मिक महत्व और परंपरा
पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए वेद वेदांग पाठशाला नरौली के आचार्य पंडित रमेश द्विवेदी ने बताया कि मकर संक्रांति का दिन दान और स्नान के लिए सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जरूरतमंदों को दान देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में त्याग और समर्पण का संदेश देता है।