पशुपालकों को लम्पी बीमारी से बचाव की दी जा रही है जानकारी, गोशालाओं में हुए टीकाकरण की चेकिंग
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डॉ. तिवारी के इस दौरे से जिले में LSD रोकथाम के प्रयासों को मजबूती मिली है और पशुपालकों को इस बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी जानकारी और आत्मविश्वास मिला है।
 

नोडल अधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार तिवारी ने किया गांवों का दौरा

LSD वैक्सीन के कोल्ड स्टोरेज का भी किया निरीक्षण

टीकाकरण अभियान और पशुओं के स्वास्थ्य का जाना हाल

चंदौली जिले में पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार तिवारी ने 19 सितंबर, 2025 को चंदौली जिले का दौरा किया। उन्होंने जिले में चल रहे लम्पी स्किन डिजीज (LSD) टीकाकरण अभियान और पशुओं के स्वास्थ्य का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पशुपालकों के बीच गोष्ठी कर उन्हें इस बीमारी से बचाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।

लम्पी वैक्सीन और गोशालाओं का निरीक्षण
निरीक्षण की शुरुआत सकलडीहा स्थित पशुचिकित्सालय से हुई, जहाँ डॉ. तिवारी ने LSD वैक्सीन के कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि वैक्सीन का रखरखाव और कूलिंग उचित है। इसके बाद उन्होंने तारापुर गांव का दौरा किया, जहाँ पहले लगाए गए टीकों का भौतिक निरीक्षण किया और पशुपालकों के साथ एक जागरूकता गोष्ठी की। उन्होंने पशुपालकों को LSD की रोकथाम के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया।

इसके बाद, डॉ. तिवारी ने बथावर गांव में टीकाकरण अभियान का निरीक्षण किया और वहां के पशुओं की स्थिति देखी। उन्होंने अस्थायी गौ आश्रय स्थल तारापुर, सदलपुरा और नोनारी का भी दौरा किया। सभी गोवंश स्वस्थ पाए गए और किसी भी पशु में LSD के लक्षण नहीं मिले। नोनारी गोशाला में पशुओं को साइलेज दिया जा रहा था और ग्राम विकास अधिकारी व प्रधान को साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

निशुल्क दवा वितरण और जागरूकता गोष्ठी
निरीक्षण के अंत में, डॉ. तिवारी ने नोनारी गांव में टीकाकरण का जायजा लिया। उन्होंने गांव के पशुपालकों के बीच मुफ्त दवाएं वितरित कीं और एक गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में पशुपालकों को LSD बीमारी के लक्षण, बचाव के उपाय और टीकाकरण के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मच्छरों और मक्खियों से फैलती है, इसलिए पशुओं के बाड़े की साफ-सफाई और कीटनाशकों का छिड़काव बेहद जरूरी है।

डॉ. तिवारी के इस दौरे से जिले में LSD रोकथाम के प्रयासों को मजबूती मिली है और पशुपालकों को इस बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी जानकारी और आत्मविश्वास मिला है।