गांव के प्रधान नहीं बनवा रहे हैं गांव की नाली, ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन तो देने लगे आश्वासन

गांव में ग्रामीणों ने विरोध जताने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। सभी लोग नबदान युक्त गंदे पानी में खड़े हो गए और वहां से प्रशासन तथा ग्राम प्रधान के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
 

पिपरी कुटिया में नाली जाम से नारकीय हालात

ग्रामीणों का नबदान के पानी में उतरकर प्रदर्शन

ग्राम प्रधान के खिलाफ फूटा गुस्सा

चंदौली जनपद के बरहनी विकास खंड अंतर्गत पिपरी कुटिया गांव में बीते शनिवार को नारकीय हालातों से जूझ रहे ग्रामीणों का सब्र टूट गया। वर्षों से खराब पड़ी नाली व्यवस्था और टूटी हुई सड़कों से परेशान ग्रामीण आखिरकार सड़क पर उतर आए और गंदे नबदान के पानी में खड़े होकर अपना विरोध दर्ज कराया। ग्राम प्रधान के प्रति गुस्से से भरे ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

2013 में बना था आरसीसी नाली-सड़क, अब हालत बदतर
गांव के बुजुर्ग और प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2013 में तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य बंधु राम के सहयोग से लाखों रुपये की लागत से लगभग 120 मीटर लंबी आरसीसी सड़क और नाली का निर्माण कराया गया था। निर्माण के समय लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों की जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन यह राहत अधिक दिनों तक नहीं टिक सकी।

करीब डेढ़ वर्षों से न तो नाली की सफाई कराई गई और न ही कोई देखरेख हुई। नाली का ढक्कन टूटकर अंदर गिर गया, जिससे नाली पूरी तरह से जाम हो गई है। परिणामस्वरूप नाली का गंदा पानी अब सड़क पर बहता रहता है, जिससे सड़क न सिर्फ जर्जर हो चुकी है बल्कि उस पर डेढ़ से दो फीट तक गंदा पानी भी भर गया है।

नाली जाम, सड़क टूटी – आमजन जीवन बेहाल
गांव की सड़क अब सड़क नहीं रही, बल्कि एक बदबूदार नाले में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों को हर रोज इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है, जिसमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि कई बार बच्चे फिसलकर इस गंदगी में गिर चुके हैं और कई लोगों को चर्म रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो चुकी हैं।

गंदगी और बीमारियों का अड्डा बनता गांव
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह स्थिति गंभीर है। गंदा पानी महीनों से जमा है, जिसमें मच्छर पनप रहे हैं। इससे मलेरिया, डेंगू और स्किन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। बरसात के दिनों में यह स्थिति और भयावह हो जाती है जब गंदा पानी घरों तक पहुंचने लगता है। कई घरों में बरामदे तक पानी भर गया है, जिससे लोगों का रहना दूभर हो गया है।

ग्राम प्रधान पर लापरवाही का आरोप
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों — रमेश राजभर, गब्बर, लालबहादुर, विवेक, नसुढ़ी राजभर, विजयी, कमला, लल्लन राजभर और रमाकांत सहित अन्य ने ग्राम प्रधान संजय मौर्य पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पिछले डेढ़ वर्षों से वे लगातार नाली सफाई और सड़क मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रधान ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया। कोई भी जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा और न ही स्थिति को देखने की जहमत उठाई।

नबदान में खड़े होकर जताया विरोध
गांव में ग्रामीणों ने विरोध जताने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। सभी लोग नबदान युक्त गंदे पानी में खड़े हो गए और वहां से प्रशासन तथा ग्राम प्रधान के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान खींचना था ताकि जिम्मेदार लोग इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज न कर सकें।

प्रधान ने किया जल्द कार्य शुरू कराने का दावा
विवाद और प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद ग्राम प्रधान संजय मौर्य ने सफाई देते हुए कहा कि नाली निर्माण का प्रस्ताव पास हो चुका है और जल्द ही कार्य शुरू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि गांव की समस्याओं को दूर करना उनकी प्राथमिकता में है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ आश्वासन है, और उन्हें अब वादा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।

जन प्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर सवाल
स्थानीय जन प्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत चुनाव के समय वोट मांगने सभी आते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद न कोई प्रतिनिधि झांकता है और न समस्याओं की सुनवाई होती है। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक प्रशासन और नेता वर्ग आंखें मूंदे रहते हैं।

सामाजिक और शैक्षिक जीवन भी प्रभावित
गांव की बदहाल सड़क और गंदगी से गांव का सामाजिक और शैक्षिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। छात्र-छात्राओं को स्कूल जाने में कठिनाई होती है। कई अभिभावकों ने बताया कि वे बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं कि कहीं रास्ते में गिर न जाएं या बीमार न पड़ जाएं।