एक बार फिर विभागीय लापरवाही से डूबी धान की फसल, सकलडीहा में 1600 बीघे खेत पानी-पानी, किसान कर रहे मुआवजे की मांग

चंदौली के सकलडीहा में ड्रेन की सफाई न होने और भारी बारिश से 1600 बीघे धान की फसल पानी में डूब गई है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा देने और बटाईदारों को राहत देने की मांग की है।

 

चंदौली में जलभराव से धान की फसल डूबने की खबर

सकलडीहा के कई गांवों में 1600 बीघे धान जलमग्न

ड्रेन सफाई में लापरवाही के चलते डूबी फसलें

किसान नेता ने प्रशासन से की मुआवजे की मांग

चंदौली जिले के सकलडीहा क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने से किसानों पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। क्षेत्र के धनउर, जामडीह, कटसील समेत कई नजदीकी गांवों में करीब 1600 बीघे धान की फसल पानी में पूरी तरह डूब गई है। कई दिनों से खेतों में पानी जमा रहने की वजह से किसानों को फसल पूरी तरह बर्बाद होने का डर सता रहा है।

जलभराव से धान की फसल डूबने की खबर

सकलडीहा के कई गांवों में 1600 बीघे धान जलमग्न

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— Vijay Kumar Tiwari (@vijayku49133779) September 3, 2026


ड्रेन सफाई न होने से रुकी पानी की निकासी
स्थानीय किसानों का साफ तौर पर आरोप है कि संबंधित विभाग ने समय रहते बारिश के पानी की निकासी के लिए बने ड्रेन की सफाई नहीं कराई। ड्रेन में कचरा और झाड़ियां जमा होने के चलते खेतों से पानी बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया है। लगातार हो रही बारिश से स्थिति दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है। अगर धान के पौधे ज्यादा दिनों तक पानी में डूबे रहे तो उनके सड़ने और पैदावार पूरी तरह खत्म होने का खतरा है।

प्रशासन की बेरुखी पर किसान नेता ने उठाए सवाल
किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी ने इस पूरी स्थिति को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा आज गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते ड्रेन की सफाई करा दी गई होती तो खेतों में जलभराव की यह नौबत ही नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी तबाही के बावजूद अब तक प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचा है।

त्वरित सर्वे, मुआवजा और आंदोलन की चेतावनी
किसान नेता ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तुरंत लेखपालों की टीम भेजकर नुकसान का सही सर्वे कराया जाए और किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए भी विशेष राहत पैकेज देने की पैरवी की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए और किसानों को राहत नहीं दी तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे।