जामडीह गाँव में संतान के लिए उमड़ता है आस्था के सैलाब, ऐसा है मंदिर का इतिहास
 

दीपावली के दूसरे दिन इस मंदिर में भक्तों का एक बड़ा मेला लगता है, जिसे लेकर ग्राम प्रधान बिहारी यादव के नेतृत्व में सुरक्षा और व्यवस्था की व्यापक तैयारियाँ की गईं थीं।
 

जोड़ा शिवलिंग के दर्शन को उमड़ते हैं श्रद्धालु

दीपावली के दूसरे दिन जामेश्वर महादेव मंदिर में दिखती है अपार आस्था

संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं लोग

दीपावली के ठीक अगले दिन चंदौली जिले का सकलडीहा क्षेत्र स्थित जामडीह गाँव आस्था के सैलाब में डूब जाता है। यहाँ के ऐतिहासिक जामेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है। इस प्राचीन मंदिर में स्थापित पौने दो सौ वर्ष पुराने जोड़ा शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों और भक्तों की प्रबल मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर मांगी गई हर मन्नत भगवान भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं।

दीपावली के दूसरे दिन इस मंदिर में भक्तों का एक बड़ा मेला लगता है, जिसे लेकर ग्राम प्रधान बिहारी यादव के नेतृत्व में सुरक्षा और व्यवस्था की व्यापक तैयारियाँ की गईं थीं। शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

मंदिर का इतिहास और चमत्कारी स्थापना
जामेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी सदियों से चली आ रही है। गाँव के बुजुर्गों के अनुसार, लगभग पौने दो सौ वर्ष पूर्व गाजीपुर जनपद के सराय पोस्ता स्टीमर घाट निवासी सुखलाल अग्रहरी को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। स्वप्न के निर्देशानुसार, सुखलाल अग्रहरी ने जामडीह गाँव के एक पीपल के पेड़ के नीचे मंदिर की स्थापना के लिए खुदाई करवाई, जहाँ से चमत्कारी जोड़ा शिवलिंग प्रकट हुआ।

इसके बाद सुखलाल अग्रहरी ने इस स्थान पर जामेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। मंदिर की स्थापना के बाद सुखलाल अग्रहरी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसे शिव का आशीर्वाद माना गया। उनका परिवार आज भी नियमित रूप से दर्शन-पूजन के लिए इस स्थान पर आता है। वर्तमान में उनके वंशज शिव प्रसाद अग्रहरी, भोला अग्रहरी, काशी प्रसाद अग्रहरी और लच्छु अग्रहरी परिवार सहित पूजा-अर्चना का कार्य संभालते हैं।

आसपास के जिलों और दूर-दराज के गाँवों से भी बड़ी संख्या में महिलाएँ और श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर जोड़ा शिवलिंग के दर्शन करते हैं और अपने परिवार के लिए मंगलकामना करते हैं।