चंदौली जिले में एक और झोलाछाप डॉक्टर ने ले ली बच्चे की जान, रक्षा हॉस्पिटल में जमकर हंगामा
झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मासूम की मौत
'रक्षा हॉस्पिटल' में परिजनों ने किया हंगामा
अस्पताल के पास कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं
परिजनों का हंगामा देखकर अस्पताल का संचालक छुपा
चंदौली जिले में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही के चलते एक बार फिर एक मासूम की जान चली गई। बलुआ थाना क्षेत्र के चहनिया स्थित 'रक्षा हॉस्पिटल' में एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से एक गरीब परिवार के इकलौते बेटे की मौत हो गई। मामूली पेट दर्द का इलाज कराने गए बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लिया। इस घटना ने एक बार फिर जिले में चल रहे अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के गोरखधंधे को उजागर कर दिया है।
घटना का विवरण
जानकारी के मुताबिक, अमिलाई गाँव के रहने वाले बहादुर पासवान पुणे में प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनका सात साल का बेटा अंकित, जो यूकेजी का छात्र था, कुछ दिनों से पीलिया से पीड़ित था। मंगलवार को परिजन अंकित को लेकर चहनिया के जगरनाथपुर स्थित 'रक्षा हॉस्पिटल' पहुँचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर ने पैसों के लालच में बच्चे को भर्ती कर लिया। पूरी रात उसे सुई और बोतल चढ़ाई गई, लेकिन बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
परिजनों ने बताया कि जब सुबह उन्होंने बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की बात कही, तो डॉक्टर ने उन्हें टालमटोल किया। जब वे खुद बच्चे को उठाकर ले जाने लगे, तो उन्होंने पाया कि अंकित बेजान हो चुका था। परिजनों ने तुरंत डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते गाँव से सैकड़ों लोग अस्पताल के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।
डॉक्टर की गिरफ्तारी और अस्पताल सील करने की कार्रवाई
परिजनों का हंगामा देखकर अस्पताल का संचालक, डॉ. मनीष दुबे, खुद को अंदर से बंद कर छिप गया। इस दौरान उसकी पत्नी ने छत से अपने ही बच्चे को फेंककर परिजनों पर फँसाने की धमकी भी दी। हंगामे की सूचना पर बलुआ एसओ अतुल कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने किसी तरह भीड़ को शांत किया और आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लिया।
मौके पर पहुँचे प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रितेश कुमार ने जब अस्पताल का रजिस्ट्रेशन माँगा, तो संचालक टालमटोल करने लगा। डॉ. रितेश ने बताया कि अस्पताल के पास कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है। उन्होंने तुरंत अस्पताल को सील करने और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल
यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। चंदौली जिले में ऐसे दर्जनों झोलाछाप डॉक्टर बेखौफ होकर अवैध अस्पताल चला रहे हैं और गरीबों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना किसी डिग्री या लाइसेंस के ये लोग इलाज के नाम पर लोगों को लूट रहे हैं और उनकी जान को जोखिम में डाल रहे हैं। यह घटना एक और चेतावनी है कि अगर स्वास्थ्य विभाग ने इन अवैध गतिविधियों पर लगाम नहीं कसी, तो ऐसे और भी हादसे हो सकते हैं। पुलिस इस मामले में परिजनों की शिकायत पर आगे की कार्रवाई कर रही है।