सकलडीहा में मुंसफ न्यायालय की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का प्रदर्शन

स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिवक्ता वर्षों से सकलडीहा में न्यायिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की मांग कर रहे हैं। इसके लिए कई बार पत्राचार और ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं
 

31 वर्षों से लंबित है मुंसफ न्यायालय की स्थापना

अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में किया जोरदार प्रदर्शन

ग्रामीणों को मामूली मुकदमों के लिए चंदौली जाना पड़ता है

चंदौली जिले के सकलडीहा तहसील में मुंसफ न्यायालय की स्थापना को लेकर वर्षों से लंबित मांग शुक्रवार को एक बार फिर जोर पकड़ गई। तहसील के अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन कर जल्द से जल्द न्यायालय की स्थापना की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया और कहा कि 31 वर्ष बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन मौन है।

1994 में हुआ था तहसील भवन का शिलान्यास
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 20 अक्टूबर 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा सकलडीहा तहसील भवन का शिलान्यास किया गया था। इसके बाद प्रशासनिक कार्य तो शुरू हो गए लेकिन अब तक मुंसफ न्यायालय की स्थापना नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों को उठानी पड़ रही भारी परेशानी
स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक व्यवस्था के अभाव में दूरदराज के ग्रामीणों को मामूली मुकदमों के लिए भी चंदौली मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि गरीब किसानों और मजदूरों को कई बार न्याय से वंचित होना पड़ता है।

अधिवक्ताओं ने जताई नाराजगी
इस मौके पर बार अध्यक्ष अशोक कुमार यादव, नितिन तिवारी, पंकज सिंह, रामराज यादव, सुरेंद्र मिश्रा समेत अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र मुंसफ न्यायालय की स्थापना नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

न्यायालय स्थापना की मांग वर्षों से लंबित
स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिवक्ता वर्षों से सकलडीहा में न्यायिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की मांग कर रहे हैं। इसके लिए कई बार पत्राचार और ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन शासन स्तर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

जनहित से जुड़ा है मुद्दा
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने कहा कि यह सिर्फ अधिवक्ताओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम जनता से जुड़ा सवाल है। न्याय तक सहज पहुंच लोकतंत्र की बुनियादी शर्तों में शामिल है, और इसे नकारा नहीं जा सकता।

सकलडीहा तहसील में मुंसफ न्यायालय की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश अब सतह पर आ चुका है। यदि जल्द ही शासन द्वारा सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो यह आंदोलन और भी व्यापक हो सकता है। न्यायिक व्यवस्था को जमीनी स्तर तक मजबूत करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे आमजन को सुलभ और सस्ता न्याय मिल सके।