एक बार फिर से खतरे के निशान के पास पहुंचा गंगा का जलस्तर, सहमे ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

घाट किनारे झुग्गियों और झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां रहने वालों को बाढ़ के साथ-साथ विषैले जीव-जंतुओं के खतरे का भी सामना करना पड़ रहा है।
 

खतरे के निशान के करीब पहुंचा गंगा का जलस्तर

पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी

तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे

चंदौली जिले के टांडाकला में गंगा का जलस्तर गुरुवार को 70.95 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से ऊपर है। पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा जलस्तर लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। खतरे का निशान 71.262 मीटर है, और पानी का स्तर उसके करीब पहुंचने से तटवर्ती गांवों में दहशत फैल गई है।

आपको बता दें कि तीन दिनों से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कांवर से लेकर नादी निधौरा तक दूसरी बार गंगा उफान पर है। बीते दिनों आई बाढ़ में पुराविजयी, पुरागनेश, चकरा, नादी और पकड़ी गांवों में घरों से लेकर खेतों तक पानी भर गया था। संपर्क मार्ग भी डूब गए थे, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी थी। अब फिर वही हालात बनते देख ग्रामीण सहमे हुए हैं।

बताते चलें कि बाढ़ की मार सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रही। खेतों में खड़ी धान की फसल और हरा चारा पानी में डूबकर बर्बाद हो गया। किसानों की मेहनत और उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, पशुपालकों के सामने चारे की समस्या खड़ी हो गई है।

घाट किनारे झुग्गियों और झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां रहने वालों को बाढ़ के साथ-साथ विषैले जीव-जंतुओं के खतरे का भी सामना करना पड़ रहा है। सांप-बिच्छू जैसे जानवर पानी बढ़ने के साथ झुग्गियों में घुस आते हैं, जिससे डर और भी बढ़ जाता है।

स्थानीय लोग अब प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। राहत शिविर और नावों की व्यवस्था जल्द न होने पर हालात और बिगड़ सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो उन्हें अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ेगा।