जितिया पर्व पर जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए किया जाने वाला पर्व है। उसी आस्था को धरती माता की सेवा से जोड़ते हुए हमने वृक्षारोपण को चुना है।
 

जितिया पर्व पर विशेष पहल

जनसेवक आलोक सिंह का अनोखा संकल्प

छह गांवों में वृक्षारोपण अभियान

प्रतिदिन 30 फलदार पौधों का रोपण

चंदौली जिले के कमालपुर में पारंपरिक पर्व जितिया के पावन अवसर पर जनसेवक आलोक सिंह ने धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए एक अनोखी पहल की। उन्होंने जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम पर वृक्षारोपण का संकल्प लिया और इसे सफल बनाने के लिए पाँच लोगों की एक सक्रिय टीम गठित की। इस टीम में दिनबंधु सिंह, झूंना सिंह, हरिबंधु, शेखर सिंह और स्वयं आलोक सिंह शामिल हैं।

यह टोली कादिराबाद, अलमखातोंपुर, करजरा, बरहन, महुरा एवं चितईपुर जैसे छह गांवों में प्रतिदिन 30 फलदार पौधे लगाने की मुहिम चला रही है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल धार्मिक परंपरा को नई दिशा देना है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरा-भरा और स्वच्छ वातावरण तैयार करना भी है।

आलोक सिंह ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए किया जाने वाला पर्व है। उसी आस्था को धरती माता की सेवा से जोड़ते हुए हमने वृक्षारोपण को चुना है। उनका मानना है कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं और यदि इन्हें संरक्षित किया जाए तो यह आने वाले समय में पर्यावरण और समाज दोनों के लिए वरदान साबित होंगे।

स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोणों से प्रेरणादायक बताया। कई ग्रामीणों ने भविष्य में इस अभियान से जुड़ने की इच्छा भी व्यक्त की।