न जाने कब पूरी तरह से बनेगी मुगलसराय से चहनिया जाने वाली सड़क,  धान रोपकर ग्रामीणों ने जताया विरोध

खराब सड़क की वजह से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक यहां से गुजरने से बचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कस्बे के अंदर डेढ़ से दो किलोमीटर तक पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
 

सड़क पर धान रोपकर जताया अपने तरीके से विरोध

काम शुरू होने के बाद भी डेढ़ वर्ष से अधूरी पड़ी है सड़क

DM-CDO ही नहीं सांसद-विधायक भी सड़क बनवाने में फेल

गड्ढों और कीचड़ से मुख्य मार्ग हो रखा है जर्जर 

समस्या न सुलझी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

चंदौली जिले के चहनियां इलाके में मुगलसराय  से चहनियां तक बनने वाली दो लेन सड़क के निर्माण में हो रही लापरवाही और धीमी गति से नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार को अनोखे तरीके से विरोध जताया। ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग पर धान की रोपाई कर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। लोगों का कहना है कि इस सड़क को बनवाने में न तो अधिकारियों की रुचि है और न ही राजनेताओं की। 

आपको बता दें कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व इस मार्ग के चौड़ीकरण और निर्माण का कार्य शुरू हुआ था, लेकिन कार्य की गति इतनी धीमी है कि आज तक सड़क अधूरी ही पड़ी है। वर्तमान स्थिति यह है कि चहनियां कस्बे से पीडीडीयू नगर की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। बारिश और जलभराव से स्थिति और भी बदतर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल निगम की पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त है, जिससे लगातार पानी बहता रहता है और सड़क पर कीचड़ तथा गड्ढे बन गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर तिरगांवा, सैदपुर घाट और सौ से अधिक गांवों के लोगों का रोजाना आवागमन होता है। खराब सड़क की वजह से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक यहां से गुजरने से बचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कस्बे के अंदर डेढ़ से दो किलोमीटर तक पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

इसी मार्ग पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विकास खंड कार्यालय, कई प्रतिष्ठान, दुकानें और स्कूल-कॉलेज स्थित हैं। ऐसे में आम लोगों, मरीजों और छात्रों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जहां सड़क थोड़ी सही थी, वहां भी घटिया गुणवत्ता की पेयजल पाइप डाल दी गई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही सड़क की मरम्मत और जलभराव की समस्या का समाधान नहीं किया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।