24 घंटे में 3 मर्डर करने वाले साइको किलर का अंत, पुलिस मुठभेड़ में ऐसे ढेर हुआ पूर्व फौजी गुरप्रीत सिंह

चंदौली में आतंक का पर्याय बने पूर्व फौजी गुरप्रीत सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। महज 24 घंटे में तीन बेगुनाह लोगों की हत्या करने वाले इस साइको किलर ने भागने की कोशिश में पुलिस पर फायरिंग की थी।

 

24 घंटे में तीन जघन्य हत्याएं

पूर्व फौजी बना था साइको किलर

सीन रिक्रिएशन के दौरान पुलिस पर हमला

सकलडीहा पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई

जवाबी फायरिंग में घायल अभियुक्त की मौत

                     

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चंदौली जिले में दहशत फैलाने वाले साइको किलर गुरप्रीत सिंह का सोमवार की देर रात अंत पुलिस मुठभेड़ में हो गया है। अमृतसर का रहने वाला यह पूर्व फौजी, जिसने महज 24 घंटे के भीतर तीन बेगुनाह लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी, सोमवार देर रात पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने पुष्टि की है कि अभियुक्त ने क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान भागने का प्रयास किया और पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

तीन जघन्य हत्याओं का खौफनाक सफर
अभियुक्त गुरप्रीत सिंह ने 10 और 11 मई के बीच चंदौली और रेल परिसर में मौत का तांडव मचाया था। पहली घटना 10 मई की सुबह डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में हुई, जहाँ उसने जमानिया निवासी मंगरू के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद 11 मई की रात 02:00 बजे जम्मूतवी एक्सप्रेस में एक अन्य यात्री की जान ली। हद तो तब हो गई जब उसने 11 मई की सुबह अलीनगर के जीवक अस्पताल में घुसकर इलाज करा रही लछमिना नामक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज में वह बिना किसी उकसावे के वारदात को अंजाम देता नजर आया था।

शराब की लत और मानसिक विचलन बना कारण
पूछताछ में पता चला कि गुरप्रीत सिंह वर्ष 2021 में सेना से सिपाही के पद से हटा था। वह बिहार के आरा में गार्ड की नौकरी करने आया था, लेकिन अत्यधिक शराब पीने के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इसी आक्रोश और मानसिक विचलन में उसने रैंडम तरीके से अनजान लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। पुलिस जांच में इन हत्याओं के पीछे कोई व्यक्तिगत रंजिश या ठोस कारण सामने नहीं आया है; उसने केवल दहशत फैलाने और आक्रोश निकालने के लिए निर्दोषों की जान ली।

एक्स आर्मी मैन को मिलता था 'ऊपर से इंडिकेशन' 
 पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गुरप्रीत सिंह वर्ष 2020 तक भारतीय सेना में कार्यरत था, जिसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी और सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने लगा। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसे लोगों की हत्या करने के लिए "ऊपर से इंडिकेशन" (संकेत) मिलता था।  उसकी मानसिक स्थिति और आपराधिक नेटवर्क की जांच के लिए एजेंसियां पहले से ही सतर्क थीं।

अस्पताल में भीड़ ने पकड़कर किया था पुलिस के हवाले 
जीवक हॉस्पिटल में फायरिंग के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई थी, लेकिन वहाँ मौजूद लोगों ने अदम्य साहस दिखाते हुए आरोपी को दौड़ाकर पकड़ लिया था। भीड़ द्वारा की गई पिटाई के बाद उसे पुलिस को सौंपा गया था। हालाँकि, सोमवार शाम को क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान उसने फिर से हिंसक होने की कोशिश की, जिसका अंत पुलिस मुठभेड़ के साथ हुआ। 

सीन रिक्रिएशन के दौरान मुठभेड़
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अलीनगर पुलिस और स्वाट टीम अभियुक्त को लेकर मुगलसराय रेलवे स्टेशन और सकलडीहा क्षेत्र में क्राइम सीन रिक्रिएशन (घटनास्थल के पुनर्निर्माण) के लिए गई थी। इसी दौरान गुरप्रीत ने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन ली और फायरिंग करते हुए भागने लगा। सूचना मिलते ही सकलडीहा पुलिस, अलीनगर पुलिस और एसओजी ने घेराबंदी की। खुद को घिरा देख अभियुक्त ने पुलिस पर दोबारा गोलियां चलाईं। पुलिस की आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई में उसे सीने में गोली लगी। उसे तत्काल उपचार हेतु अस्पताल भेजा गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

हथियारों की बरामदगी 
पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से एक रिवॉल्वर, तीन खोखा कारतूस और एक टूटी हुई डबल बैरल गन (DBBL) बरामद की है। प्राथमिक जांच में रिवॉल्वर और गन लाइसेंसी प्रतीत हो रही हैं। गुरप्रीत के खिलाफ अलीनगर और जीआरपी थाने में हत्या के कुल तीन मुकदमे दर्ज थे। इस सफल और त्वरित कार्रवाई में अलीनगर पुलिस, जीआरपी डीडीयूनगर, स्वाट टीम और सकलडीहा पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस एनकाउंटर के बाद जनपद में व्याप्त दहशत कम हुई है और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।