बिना मिले लौटे डीएम तो बढ़ा ग्रामीणों का गुस्सा, पुरैनी के किसानों ने दी सकलडीहा तहसील पर धरने की बड़ी चेतावनी

 

धानापुर के पुरैनी गांव में चकबंदी प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए अब पीड़ित किसानों ने गांधीवादी तरीके से बड़े आंदोलन का मन बना लिया है।

 
 

पुरैनी गांव में चकबंदी पर भारी बवाल

अधिकारियों पर पैसे लेने का आरोप

छोटे और गरीब किसान हुए परेशान

सकलडीहा एसडीएम से मांगेंगे धरना अनुमति

जिलाधिकारी के न सुनने से मायूसी

चंदौली जिले के धानापुर विकासखंड के पुरैनी गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए किसानों ने चकबंदी विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि विभाग के अधिकारी मोटी रकम लेकर रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचा रहे हैं। इस धांधली की वजह से गांव के छोटे और गरीब किसानों के अधिकारों को कुचला जा रहा है।

कीमती जमीनों के आवंटन में हुआ खेल
ग्रामीणों का कहना है कि वे धारा 52 के तहत की जा रही इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि जो जमीनें मुख्य सड़क के किनारे या गंगा नदी के पास थीं, वे बहुत मूल्यवान हैं। अफसरों ने पैसे का लालच देकर उन कीमती जमीनों को कुछ खास लोगों के नाम पर आवंटित कर दिया है। इस पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण गांव के सीमांत किसानों के बीच गहरा आक्रोश फैल गया है।

गरीबों को गंगा किनारे भेजने की साजिश
पुरैनी गांव के रहने वाले खरपत राम ने बताया कि उनके गांव की आबादी लगभग तीन हजार है, जिसमें करीब एक हजार मतदाता हैं। यहां के ज्यादातर लोग छोटे और मध्यम श्रेणी के किसान हैं। आरोप है कि पैसे और ताकत के दम पर कुछ प्रभावशाली लोग गरीब किसानों की अच्छी जमीनों को हड़प रहे हैं और उनके चक को जबरन गंगा किनारे के कटान क्षेत्र में ट्रांसफर करवा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

डीएम से नहीं मिली राहत, अब होगी बड़ी लड़ाई
ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। सोमवार को जब जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग गुरैनी पंप कैनाल पर आए थे, तब ग्रामीणों ने उनसे भी इस अनियमितता की शिकायत की थी। लेकिन डीएम साहब ने अपनी व्यस्तता का हवाला दिया और बिना बात सुने वापस लौट गए, जिससे ग्रामीणों में भारी मायूसी छा गई। अब परेशान किसानों ने सकलडीहा उपजिलाधिकारी (SDM) से गांधीवादी तरीके से धरने पर बैठने की अनुमति मांगी है।

इस बड़े प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से वासुदेव निषाद, दशमी निषाद, महेंद्र निषाद, संतोष निषाद, दिलीप, राजेश, संजय, रामअवध, हरिओम मिश्रा, बालकिशन यादव, अनिल, टुनटुन और अरुण सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।