152 साल पुरानी रामलीला का मंचन शुरू, 'राम जन्म' की लीला से गूंजा इलाका
'राम जन्म' के मंचन से भक्ति का माहौल
प्रबंधक धनंजय सिंह ने उतारी भगवान राम की आरती
कहा- रामलीला हमारे धर्म
संस्कृति और विरासत का प्रतीक
चंदौली जिले के चहनिया विकास खंड के प्रसिद्ध रामगढ़ गांव में 152 साल पुरानी रामलीला का मंचन शनिवार को शुरू हो गया। 14 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला का उद्घाटन लोकनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संस्थापक व प्रबंधक धनंजय सिंह ने फीता काटकर और भगवान राम की आरती उतारकर किया।
रामलीला के पहले दिन 'राम जन्म' का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचन के पहले दृश्य में, रावण और अन्य राक्षसों के अत्याचारों से परेशान देवता भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अवतार लेने की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद, राजा दशरथ के संतान न होने पर, उनके कुलगुरु वशिष्ठ उन्हें श्रृंगी ऋषि से 'पुत्र कामेष्टि यज्ञ' कराने की सलाह देते हैं।
यज्ञ कुंड से अग्नि देवता प्रकट होकर खीर देते हैं, जिसे राजा दशरथ अपनी तीनों रानियों- कौशल्या, कैकई और सुमित्रा को देते हैं। खीर खाने के बाद तीनों रानियां गर्भवती हो जाती हैं। इसी बीच, मंच पर "भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी" का पार्श्व संगीत बजने लगता है।
इसके बाद, रामजन्म के समाचार से पूरी अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ जाती है। भगवान राम के साथ उनके तीनों भाइयों का जन्म होता है। ग्रामीण महिलाएं "अवध नगरी में चारों ओर बधाई गीत, सोहर गाए गए। कौशल्या भयो लल्ला, अवध में मचो हल्ला" जैसे बधाई गीत गाती हैं। भगवान शंकर भी भगवान राम के बाल रूप से मिलने योगी का भेष धारण कर आते हैं।
अंत में, चारों भाइयों का नामकरण गुरु वशिष्ठ द्वारा किया जाता है। इसके बाद, भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न शिक्षा-दीक्षा के लिए गुरु वशिष्ठ के आश्रम की ओर प्रस्थान करते हैं। भगवान राम की बाल लीला का मंचन देखकर दर्शक पूरी तरह से भक्ति में लीन हो गए।
रामलीला हमारी संस्कृति और विरासत का प्रतीक
उद्घाटन के दौरान प्रबंधक धनंजय सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम भारतवासियों के आराध्यदेव हैं और उनका जीवन हर व्यक्ति को मर्यादा, पुरुषार्थ और लक्ष्य के प्रति समर्पण का बड़ा संदेश देता है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला हमारे धर्म, संस्कृति और विरासत का प्रतीक है।
इस मौके पर राजेंद्र मिश्र, शोभनाथ पांडेय, राधेश्याम पांडेय, श्यामलाल सिंह, शैलेंद्र सिंह, अकरम अली, मुहम्मद रफीक, प्रभुनाथ पांडेय, सुधींद्र पांडेय, रमेश सिंह, रविंद्र सिंह, ऋषिकेश यादव, राकेश यादव, अर्पित पांडेय, डॉ. सूतप राय, घुरहू गोंड, रामकृपाल सिंह, राजेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।