बनकर तैयार हुआ नवीन ममता राजकीय आवासीय विद्यालय, जुलाई से मानसिक दिव्यांग बच्चों को मिलेगी आधुनिक शिक्षा

 

चंदौली के सकलडीहा तहसील अंतर्गत धरहरा में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए ₹11.69 करोड़ की लागत से सर्वसुविधायुक्त आवासीय विद्यालय बनकर तैयार हो गया है। आगामी जुलाई महीने से शुरू होने वाले इस स्कूल की पूरी व्यवस्था जानने के लिए पढ़ें।

 
 

सकलडीहा के धरहरा में निर्माण

कुल 100 कमरों का भवन

कुल लागत ₹11.69 करोड़ रुपये

पूर्वांचल के 10 जिलों को लाभ

जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई

चंदौली जिले के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आई है। सकलडीहा तहसील के अंतर्गत आने वाले धरहरा गांव में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों को बेहतर, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए करोड़ों की लागत से "नवीन ममता राजकीय मानसिक मंदित आवासीय विद्यालय" का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। इस अत्याधुनिक विद्यालय में आगामी जुलाई महीने से पठन-पाठन का कार्य सुचारू रूप से शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

पूर्वांचल के 10 जिलों के 100 बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ
इस नवनिर्मित आवासीय विद्यालय के शुरू होने से न केवल चंदौली, बल्कि पूर्वांचल के कुल 10 जिलों के मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों को सीधे तौर पर आवास और उत्कृष्ट शिक्षा का लाभ मिलेगा। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश नायक ने बताया कि 100 कमरों का यह भव्य और सर्वसुविधायुक्त भवन बनकर पूरी तरह तैयार है। इस आवासीय विद्यालय में दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ सुरक्षित माहौल में रहने और पौष्टिक भोजन की उत्तम व्यवस्था भी मिलेगी। जुलाई से कक्षाएं विधिवत शुरू करने के लिए फर्नीचर से लेकर पढ़ाई-लिखाई के लिए जरूरी सभी उपकरणों को मंगाने का काम तेजी से किया जा रहा है।

₹11.69 करोड़ की लागत से साल 2022 से चल रहा था निर्माण
मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षित व सशक्त बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से इस वृहद परियोजना की शुरुआत जनवरी 2022 में कराई गई थी। धरहरा गांव में करोड़ों की भारी-भरकम लागत से बन रहे इस दो मंजिला नवीन ममता राजकीय मानसिक मंदित आवासीय विद्यालय को तैयार करने में कुल ₹11.69 करोड़ की लागत आई है। वर्तमान में भवन के रंग-रोगन और साज-सज्जा का कार्य भी पूरी तरह पूरा किया जा चुका है। यहाँ एक साथ 100 बच्चों के रहने, खाने, पढ़ाई और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के प्रयासों से मिली थी मंजूरी
इस महत्वपूर्ण परियोजना की पृष्ठभूमि की बात करें तो वर्ष 2022 में जब तत्कालीन कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर होमगार्ड व दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मंत्री थे, तब उन्होंने धरहरा गांव में इस अति-आवश्यक विद्यालय को बनवाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी से विशेष आग्रह किया था। शासन स्तर से प्रस्ताव को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद साल 2022 में इसका निर्माण कार्य शुरू कराया गया था, जो अब पूरी तरह धरातल पर उतर चुका है।

बच्चों को स्वावलंबी बनाने के लिए मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
विभागीय जानकारी के अनुसार, वाराणसी मंडल और पूरे पूर्वांचल के 10 जिलों में इस तरह का यह पहला विशेष आवासीय विद्यालय होगा। वर्तमान समय में इस श्रेणी के विशिष्ट विद्यालयों की सुविधा केवल प्रयागराज और गोरखपुर में ही उपलब्ध है। पीडीडीयू नगर के को-ऑर्डिनेटर अंकित सिंह ने बताया कि इस विद्यालय में दाखिला लेने वाले दिव्यांग बच्चों को सबसे पहले उनकी दैनिक क्रियाओं (डेली लाइफ एक्टिविटीज) का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उनके भीतर खुद से अपने जरूरी कार्यों को करने की क्षमता का क्रमिक विकास किया जाएगा।

इसके साथ ही बच्चों को रंगों, विभिन्न वस्तुओं की पहचान कराई जाएगी तथा उनके सोचने, समझने, बोलने और लिखने-पढ़ने की समझ को पैदा करने की दिशा में सकारात्मक पहल होगी। पढ़ाई और मानसिक विकास के अलावा यहाँ कुटीर उद्योग से लेकर विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार मुहैया कराने वाले व्यावहारिक कोर्सेज भी सिखाए जाएंगे, ताकि भविष्य में रोजगार के लिए बच्चों को कहीं बाहर न जाना पड़े। 
कहा जा रहा है कि प्रशिक्षण के बाद बच्चों को उनकी व्यक्तिगत क्षमता और रुचि के अनुसार रोजगार के उचित अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। सरकार की इस पहल से अब इस विद्यालय में तैनात किए जाने वाले विशेष शिक्षकों की देखरेख में दिव्यांग बच्चे अपने भविष्य को संवार सकेंगे।