सिंचाई विभाग की बड़ी लापरवाही: सदलपुरा में फिर टूटा नहर का तटबंध, 300 एकड़ गेहूं की फसल हुई जलमग्न

चंदौली के सदलपुरा में बढ़वलडीह रजवाहा का तटबंध टूटने से 300 एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहरों की बदहाली ने विभाग की पोल खोल दी है, जिससे किसानों में भारी गुस्सा है।

 

300 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न

हफ्ते भर में दूसरी बार टूटा तटबंध

4 करोड़ की सफाई पर उठे सवाल

विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भारी आक्रोश

प्रभावित किसानों ने की मुआवजे की मांग

चंदौली जनपद में नहरों के टूटने और किसानों की गाढ़ी कमाई के पानी में डूबने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला शहाबगंज क्षेत्र के सदलपुरा गांव का है, जहाँ बढ़वलडीह रजवाहा का तटबंध अचानक टूट जाने से करीब 300 एकड़ में लगी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई है। इस घटना ने सिंचाई विभाग के दावों और कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी है।

लाखों की लागत, फिर भी कमजोर तटबंध
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि हाल ही में बढ़वलडीह रजवाहा की सिल्ट सफाई और तटबंधों की मजबूती के नाम पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन हकीकत यह है कि कागजों पर काम पूरा दिखाकर धरातल पर महज खानापूर्ति की गई। तटबंध इतना कमजोर था कि पानी के दबाव को झेल नहीं सका। किसानों का कहना है कि अगर विभाग ने ईमानदारी से काम किया होता, तो आज उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता।

एक सप्ताह में दूसरी बार हुई तबाही
सदलपुरा के किसानों की परेशानी तब और बढ़ गई जब पता चला कि यह इसी रजवाहा में टूटने की दूसरी घटना है। प्रधान पति विवेक सिंह ने बताया कि महज एक सप्ताह पूर्व भी इसी रजवाहा का तटबंध टूटा था, जिससे 50 बीघा फसल बर्बाद हुई थी। बार-बार हो रही इन घटनाओं के बावजूद अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया, जिसका नतीजा आज 300 एकड़ फसल की तबाही के रूप में सामने आया है।

अधिकारियों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार का आरोप
आक्रोशित किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि सफाई के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। वर्तमान में सदलपुरा और आसपास के दर्जनों किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से फसल के नुकसान का सर्वे कराकर तत्काल मुआवजे की मांग की है।

प्रशासनिक आश्वासन और मरम्मत कार्य
मामला तूल पकड़ते देख विभागीय अधिकारियों ने सफाई दी है कि तटबंध की मरम्मत के लिए टीम भेज दी गई है। हालांकि, किसान अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि चार करोड़ के खर्च की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसानों की फसलों के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो।