सकलडीहा इंटर कॉलेज में महर्षि वेदव्यास पूजनोत्सव आयोजित: पूर्व प्राचार्य श्री कमलापति पाण्डेय को मिला 'व्यास सम्मान-2026'
सकलडीहा इंटर कॉलेज में भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा महर्षि वेदव्यास पूजनोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान पूर्व प्राचार्य श्री कमलापति पाण्डेय को 'व्यास सम्मान-2026' से सम्मानित किया गया और गुरु-शिष्य परंपरा पर चर्चा हुई।
सकलडीहा इंटर कॉलेज में व्यास पूजनोत्सव
श्री कमलापति पाण्डेय 'व्यास सम्मान-2026' से सम्मानित
भारतीय शिक्षण मंडल काशी प्रांत का आयोजन
बीएचयू हिंदी विभाग के डॉ. अशोक ज्योति का संबोधन
गुरु-शिष्य की सात्विक परंपरा पुनः स्थापित करने पर जोर
चंदौली जिले के सकलडीहा इंटर कॉलेज में भारतीय शिक्षण मंडल (काशी प्रांत) द्वारा महर्षि वेदव्यास पूजनोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के कई विद्वानों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर संस्थान के पूर्व प्राचार्य श्री कमलापति पाण्डेय को शिक्षा और समाज में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 'व्यास सम्मान-2026' से सम्मानित किया गया।
निरंतर सीखने से आता है ज्ञानबोध: श्री कमलापति पाण्डेय
अपने संबोधन में श्री कमलापति पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है और निरंतर सीखने से ही ज्ञानबोध होता है। उन्होंने अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे बच्चों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ न डालें, बल्कि उन्हें उनकी क्षमता और बुद्धि के अनुसार स्वाभाविक रूप से अपना लक्ष्य तय करने दें।
महर्षियों के ज्ञान और उच्च मूल्यों को संजोने की जरूरत
मुख्य वक्ता बीएचयू के हिंदी विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि भारत की संस्कृति ऋषि संस्कृति रही है। महाभारत का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि वेदव्यास ने समाज में अहिंसा, समता, शांति, दया जैसे उच्च मूल्यों की स्थापना की है। वहीं बलुआँ इंटर कॉलेज के शिक्षक कमलेश सरोज ने क्षीण होते गुरु-शिष्य संबंधों को बचाते हुए प्राचीन सात्विक परंपरा को पुनर्स्थापित करने की बात कही।
संस्कार और नियमित अध्ययन से मिलेगा लक्ष्य
मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी श्री गोपाल कृष्ण तिवारी ने युवाओं को 8 से 10 घंटे नियमित अध्ययन करने और संस्कारों का निर्माण करने की सलाह दी। वहीं कॉलेज के प्राचार्य श्री घनश्याम त्रिपाठी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में गुरुओं के स्व-अवलोकन पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन कैप्टन सत्यमूर्ति ओझा ने किया। इस दौरान 30 से अधिक शिक्षक और 250 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।