अतिवृष्टि से बर्बाद फसलों के मुआवजे और वसूली रोकने के लिए किसान यूनियन ने SDM को सौंपा ज्ञापन
पूरे जनपद को आपदा जिला घोषित करने की मांग
सकलडीहा SDM को सौंपा ज्ञापन
भाकियू टिकैत की चेतावनी
दो दिन में सर्वे न हुआ तो किसान करेंगे तहसील में धरना
चंदौली के सकलडीहा क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने किसानों की समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी के नेतृत्व में लेहरा, खडेहरा, मनिहरा, ताजपुर, दुर्गापुर समेत बीसियों गाँव के किसानों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कुंदन राज कपूर से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। किसानों की मुख्य मांगें असमय अतिवृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा और कर्ज तथा बिजली बिल समेत सभी प्रकार की वसूली तुरंत रोकने की हैं।
पूरे जनपद को आपदा जिला घोषित करने की मांग
भाकियू (टिकैत) के प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने एसडीएम को चेताया कि जनपद में दो बार बाढ़ और एक बार असमय अतिवृष्टि से फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि जब क्षति स्पष्ट है, तो विस्तृत सर्वे की आवश्यकता नहीं है, बल्कि पूरे जनपद को तत्काल आपदा जिला घोषित किया जाना चाहिए। किसानों ने मांग की है कि उनकी ऋण और बिजली बिल पूरी तरह माफ की जाए, और यदि माफी संभव न हो, तो कम से कम एक साल के लिए किसी भी किस्म की वसूली पर रोक लगाई जाए।
लेखपालों की लापरवाही पर कड़ी चेतावनी
किसानों ने आरोप लगाया कि तमाम गाँवों में अभी तक फसल नुकसान का सर्वे ही नहीं हुआ है। कई लेखपाल हिला-हवाली कर रहे हैं और घर बैठे ही सर्वे किया जा रहा है, जिससे वास्तविक नुकसान का आकलन नहीं हो पा रहा है। भाकियू ने एसडीएम को चेताया है कि यदि दो दिनों के भीतर लेखपाल संबंधित गाँवों के किसानों से मिलकर निष्पक्ष सर्वे नहीं करते हैं, तो गाँव के सभी किसान तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। एसडीएम ने किसानों को तीन दिन का समय दिया है।
जिलाधिकारी से मुलाकात की तैयारी
एसडीएम से मुलाकात के बाद भी किसान संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने शनिवार को बड़ी संख्या में जिलाधिकारी से मिलकर इस मुद्दे को उठाने की घोषणा की है। इस दौरान तहसील अध्यक्ष श्रवण मौर्या और ब्लॉक उपाध्यक्ष राम लाल सहित सोनू सिंह, गजाधर दुबे, दिलीप, बबलू पांडेय जैसे अनेक किसान मौजूद रहे। किसान नेता स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उनकी मांगें, विशेषकर एक साल के लिए वसूली रोकने की मांग, पूरी नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।