सकलडीहा पीजी कॉलेज में आईपीआर संगोष्ठी: जानिए कैसे कराएं अपने मौलिक विचारों और रिसर्च का पेटेंट
सकलडीहा पीजी कॉलेज में आईपीआर संगोष्ठी
पेटेंट और कॉपीराइट पर विशेष चर्चा
मौलिक शोध और विचारों का कानूनी संरक्षण
प्रोफेसर दया शंकर ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
छात्रों और शिक्षकों की रही सक्रिय भागीदारी
चंदौली जिले के सकलडीहा पीजी कॉलेज के सभागार में बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स-आईपीआर) विषय पर एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को आईपीआर के महत्व से परिचित कराना था।
संगोष्ठी में बताया गया कि कैसे कोई व्यक्ति अपने मौलिक विचारों, शोध और रचनात्मक कार्यों को कानूनी रूप से सुरक्षित रख सकता है। इस दौरान कॉलेज के प्रोफेसरों और छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के बताए गए नियम
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रो. इंद्रदेव सिंह ने की, जबकि मुख्य वक्ता प्रो. दया शंकर रहे। उन्होंने आईपीआर के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से रोशनी डाली और पेटेंट, कॉपीराइट व ट्रेडमार्क के बारे में आसान भाषा में समझाया। मुख्य वक्ता ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का नया विचार, मौलिक शोध या रचनात्मक काम उसकी असली संपत्ति है। आईपीआर के जरिए इन सभी कामों को कानूनी संरक्षण मिलता है, जिससे कोई दूसरा इसे चुरा नहीं सकता।
शोधार्थियों और छात्रों के लिए क्यों जरूरी है आईपीआर?
कार्यक्रम का संचालन प्रो. शमीम राइन ने किया और इसके संयोजक अमन मिश्रा रहे। प्रो. शमीम राइन ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आईपीआर की समझ होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों और रिसर्च करने वाले छात्रों को अपने प्रोजेक्ट्स और शोध को सुरक्षित रखने के लिए पेटेंट व्यवस्था की जानकारी रखनी चाहिए। इससे उनकी मेहनत का सही श्रेय उन्हीं को मिलता है।
विशेषज्ञों ने दूर की छात्रों की जिज्ञासाएं
संगोष्ठी में डॉ. सीता मिश्रा समेत कॉलेज के अन्य शिक्षक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं के समाधान के लिए सवाल भी पूछे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने माना कि ऐसी संगोष्ठियों से छात्रों को अपने नए विचारों और आविष्कारों को कानूनी सुरक्षा देने में मदद मिलेगी।