आवारा सांड के हमले में घायल किसान विकास सिंह की मौत, 8 दिन तक जिंदगी-मौत से जंग में हार गया किसान 

 

सकलडीहा कोतवाली के अमावल गांव में छुट्टा गोवंश के हमले में घायल किसान विकास सिंह की रविवार को मौत हो गई। 19 सितंबर को खेत से लौटते समय गोवंश ने पटक-पटक कर घायल किया था। वाराणसी में इलाज के दौरान 8 दिन बाद दम तोड़ा।

 
 

सकलडीहा अमावल गांव में छुट्टा गोवंश के हमले में किसान विकास सिंह की मौत

 19 सितंबर को धान की फसल देखकर लौटते समय किया था हमला, सिर और रीढ़ में गंभीर चोट

चतुर्भुजपुर से जिला अस्पताल फिर वाराणसी निजी अस्पताल में चला 8 दिन इलाज

 पीछे पत्नी, दो बेटियां निशा (24), छोटी (20) और बेटा सत्यम (18) छोड़े

ग्रामीणों ने छुट्टा गोवंश को गोशाला भेजने और कार्रवाई की मांग की

जानकारी के अनुसार, विकास सिंह 19 सितंबर की सुबह अपनी धान की फसल देखकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में एक छुट्टा गोवंश ने अचानक उन पर हमला कर दिया। गोवंश ने किसान को उठाकर कई बार सड़क पर पटक दिया। हमले में विकास सिंह के सिर, शरीर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं। वह खून से लथपथ होकर सड़क पर गिर पड़े।

आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह गोवंश को वहां से भगाया और घायल किसान को उपचार के लिए चतुर्भुजपुर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद विकास सिंह की हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन बेहतर इलाज के लिए उन्हें वाराणसी के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार चल रहा था।

करीब आठ दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद रविवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के लाख प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

विकास सिंह की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां निशा सिंह (24) और छोटी सिंह (20) तथा एक बेटा सत्यम सिंह (18) छोड़ गए हैं। परिवार के सामने अब आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी संकट खड़ा हो गया है। गांव के लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।

क्षेत्र में लंबे समय से है छुट्टा गोवंश की समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में छुट्टा गोवंश की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही सड़क और गांव की गलियों में घूमने वाले गोवंश से लोगों को खतरा बना रहता है। कई बार किसान फसल बचाने के चक्कर में इन पशुओं से भिड़ जाते हैं और घायल हो जाते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी कई लोगों पर छुट्टा पशुओं ने हमला किया है, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सड़कों पर झुंड में घूम रहे गोवंश से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से छुट्टा गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में भेजने तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो ऐसी घटनाएं फिर हो सकती हैं।