आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह-ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ 
 

कथा के दौरान आचार्य जी ने कहा कि जहाँ बड़े-बड़े योगी बैकुंठ जाने की इच्छा रखते हैं, वहीं बैकुंठ के निवासी नारद जी स्वयं मृत्युलोक में आते हैं।
 

निदिलपुर गाँव में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

प्रसिद्ध कथावाचक जगद्गुरु रामानुजाचार्य आचार्य गिरिधर ने सुनायी कथा

परीक्षित प्रसंग का वर्णन करते हुए दिया गहरा संदेश

चंदौली जिले के धानापुर क्षेत्र के निदिलपुर गाँव में सुदामा सिंह के निवास पर गुरुवार से आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह-ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बिहार के आरा से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक जगद्गुरु रामानुजाचार्य आचार्य गिरिधर ने पहले दिन की कथा का वाचन किया और श्रद्धालुओं को भागवत महात्म्य का श्रवण कराया।

कथा की शुरुआत करते हुए आचार्य गिरिधर ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो, यदि वह भारतीय परंपरा के प्रति सच्ची श्रद्धा रखता है और भगवान एवं उनकी लीलाओं का गायन करता है, तो वह सम्मान का पात्र है। उन्होंने आज के दौर की बाजारवादी व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि जहाँ बाजार में हर वस्तु का मूल्य तय होता है, वहीं जीवन में हमारी आवश्यकताएं सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें अपनी वास्तविक जरूरतों को समझना चाहिए न कि बाज़ार के दिखावे के पीछे भागना चाहिए।

आचार्य गिरिधर ने परीक्षित प्रसंग का वर्णन करते हुए एक गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देवताओं के लिए अमृत भले ही अमरता का साधन हो, लेकिन वे भी असुरों के भय से मुक्त नहीं हो पाते। इसके विपरीत, जो व्यक्ति ज्ञान-अमृत प्राप्त कर लेता है, वह मृत्यु को पार कर जाता है, यानी वह मृत्यु से भयभीत नहीं होता। उन्होंने समझाया कि अज्ञान और भय ही हमारी वास्तविक मृत्यु है, जबकि सच्चाई यह है कि मृत्यु दो जीवनों का मिलन है, एक का अंत और दूसरे का आरंभ।

कथा के दौरान आचार्य जी ने कहा कि जहाँ बड़े-बड़े योगी बैकुंठ जाने की इच्छा रखते हैं, वहीं बैकुंठ के निवासी नारद जी स्वयं मृत्युलोक में आते हैं। उन्होंने इस रहस्य को अगले दिन की कथा में खोलने का आश्वासन देते हुए पहले दिन की कथा को विराम दिया।

इस धार्मिक आयोजन में सुदामा सिंह, विजयशंकर सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुलशन सिंह, जयनाथ तिवारी, उमाकांत तिवारी, दिनेश तिवारी, हरिओम सिंह, शोभनाथ मौर्य, अनिल मौर्य, श्रीकांत सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने कथा का लाभ उठाया।