बारिश कम होने से थमने लगा है गंगा का जलस्तर, जिले के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का साया बरकरार
चहनियां और धानापुर ब्लॉक के गांवों तक पहुंचा पानी
अगस्त और सितंबर की बाढ़ से फसलों को भारी नुकसान
कुंडा कला और भूपौली समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में
चंदौली जिले में गंगा का जलस्तर बुधवार को सुबह से शाम तक स्थिर होने से तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लेकिन बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। गंगा का पानी चहनियां और धानापुर ब्लॉक के कई गांवों के सीवान तक पहुंच गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।
खतरे के निशान से नीचे लेकिन चिंता बरकरार
आपको बता दें कि शाम छह बजे तक गंगा का जलस्तर खतरा बिंदु 71.26 मीटर से महज 43 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया। वहीं चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से जलस्तर अब भी 60 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। जलस्तर 70.83 मीटर पर स्थिर रहने से थोड़ी राहत जरूर है, लेकिन बाढ़ की आशंका कम नहीं हुई है।
खेती को हुआ भारी नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में आई बाढ़ से ही उनकी खेती तबाह हो गई थी। जो कुछ बचा था, वह दूसरी बार आई बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गया। अब गंगा का पानी सीवान तक पहुंच जाने से खेतों में बोआई और फसल की उम्मीदें भी धूमिल हो गई हैं।
गांवों में बाढ़ का खतरा
दुलहीपुर क्षेत्र के कुंडा कला, कुंडा खुर्द, कैली, कुरहना और भूपौली गांव बाढ़ के सीधे खतरे में हैं। वहीं पड़ाव क्षेत्र में बहादुरपुर, मढ़ियां, सूजाबाद और डोमरी गांवों में पिछली बार पानी भर गया था। फिलहाल पानी गांवों से कुछ दूरी पर है, लेकिन यदि जलस्तर दोबारा बढ़ा तो इन इलाकों के लोग संकट में पड़ सकते हैं।
कटान से परेशान किसान
तटवर्ती क्षेत्रों में कटान की समस्या वर्षों से बनी हुई है। किसान बताते हैं कि गंगा का पानी पीछे हटने के बाद भी कटान का दंश उनकी जमीन को हर साल निगलता है। डेरवा, महड़ौरा, कांवर, पकड़ी, महुअरिया और गंगापुर समेत दर्जनों गांवों के किसानों में इस बार भी कटान का डर सताने लगा है।
सड़क और घाट डूबे
चहनियां क्षेत्र के टांडा और कैथी गांवों के रास्तों तक पानी पहुंच चुका है। बलुआ घाट पर बनी सीढ़ियां, गंगा आरती स्थल और श्मशान घाट अब भी जलमग्न हैं। इससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
धानापुर क्षेत्र के हिंगुतरगढ़, रायपुर, नादी निधौरा, प्रहलादपुर, दीयां प्रसहटा और नरौली गांवों के लोगों ने गंगा का जलस्तर स्थिर होने पर फिलहाल राहत की सांस ली है। हालांकि सबकी नजरें अब प्रशासन और मौसम पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात कैसे रहते हैं।