AI कोडिंग व डिजिटल लिट्रेसी से लैस होंगे चंदौली के सरकारी स्कूलों के बच्चे, जानिए पूरा प्लान

शासन स्तर पर यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि विद्यार्थी आने वाले समय में तकनीकी बदलावों और एआइ आधारित कार्य प्रणालियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।
 

आईआईटी कानपुर में जिले के दस शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

कक्षा छह से आठ तक विद्यार्थियों को पढ़ाई जाएगी नई तकनीक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग पर विशेष जोर

चंदौली जिले के परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थी आधुनिक तकनीक से लैस होंगे। शिक्षा विभाग ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) कोडिंग, डिजिटल लिट्रेसी और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की विशेष ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है। इस पहल से कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थी भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकेंगे।

दस शिक्षक होंगे चयनित

चंदौली के परिषदीय स्कूलों से विज्ञान विषय के दस शिक्षकों का चयन किया जाएगा। इन्हें आईआईटी कानपुर में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये शिक्षक जिले के मास्टर ट्रेनर बनेंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षित शिक्षक विद्यार्थियों को कक्षाओं में एआइ और डिजिटल लर्निंग से परिचित कराएंगे।

तीन माह चलेगा प्रशिक्षण

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) सचिन कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण अक्टूबर से शुरू होगा और तीन माह तक चलेगा। इस दौरान शिक्षकों को एआइ, कोडिंग और डिजिटल लर्निंग पढ़ाने की तकनीक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सिखाई जाएगी।

65 हजार से अधिक बच्चे होंगे लाभान्वित

चंदौली जिले में कुल 1,185 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें से 447 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें 65 हजार 341 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इस नई व्यवस्था से इन बच्चों को डिजिटल और हाईटेक ज्ञान मिलेगा।

भविष्य की दृष्टि से बड़ा कदम

शासन स्तर पर यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि विद्यार्थी आने वाले समय में तकनीकी बदलावों और एआइ आधारित कार्य प्रणालियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। बीएसए ने बताया कि भविष्य में हर क्षेत्र में एआइ और डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ेगा, इसलिए विद्यार्थियों को अभी से तैयार करना बेहद आवश्यक है।

बच्चों की पढ़ाई होगी रोचक

शिक्षकों को यह भी सिखाया जाएगा कि किस तरह आईटी विषय को रोचक ढंग से पढ़ाया जाए, ताकि बच्चे इसमें रुचि लें। इस पहल से विद्यार्थी न केवल पढ़ाई को आधुनिक ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम होंगे।

शिक्षा विभाग की यह योजना विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित होगी। एआइ कोडिंग, डिजिटल लिट्रेसी और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के गुर सीखकर विद्यार्थी प्रतिस्पर्धी दुनिया में आगे बढ़ने के लिए तैयार होंगे।