जनपद चंदौली को 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य, CDO ने दिए निर्देश

सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रमिकों की पहचान और उन्हें मुक्त कराने के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टीमें गठित की जाएं।
 

2026 तक चंदौली को बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई महत्वपूर्ण बैठक

सीडीओ आर. जगत साईं ने की अध्यक्षता

सभी विभागों से बेहतर समन्वय की अपील

चंदौली जनपद को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने ठोस रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय टास्क फोर्स एवं बाल श्रम उन्मूलन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि चंदौली को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त जनपद घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि बालक एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत यदि किसी फैक्ट्री, दुकान, संस्था अथवा घर में बाल श्रमिक कार्यरत पाए जाते हैं तो नियोजकों पर 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही छह माह से दो वर्ष तक का कारावास अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं।

सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रमिकों की पहचान और उन्हें मुक्त कराने के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टीमें गठित की जाएं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, श्रम विभाग और समाज कल्याण विभाग को समन्वय स्थापित कर ठोस कार्रवाई करनी होगी।

बैठक में निर्णय लिया गया कि बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सीडीओ ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कागजों पर उपलब्धि हासिल करना नहीं है, बल्कि बच्चों को वास्तविक रूप से सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य देना है।

इस बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी चन्द्र प्रकाश, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, समिति के सभी सदस्य और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।